नोएडा: छोटी सी उम्र और बैग का वजन 4-5 kg. ये हाल है नोएडा में चलने वाले प्राइवेट स्कूल के बच्चों का। इस संबंध में जिला गौतम बुद्ध नगर के कलेक्टर से जानकारी मांगी गयी तो कलेक्टर साहेब ने जानकारी नही दिया। अब सवाल यह उठता है कि क्या गौतम बुद्ध नगर के कलेक्टर साहेब को नही मालूम कि कक्षा पहली, दूसरी और तीसरी के बच्चों को कितनी किताबे पढ़ने के लिए दी जा रही है? इस छोटी सी उम्र में नन्हे बच्चो को 10 से 12 किताबें पढ़ने के लिए दी जाती है। इतनी किताबे तो कलेक्टर साहेब ने भी नही पढ़ी होंगी पहली, दूसरी, तीसरी कक्षा में। इतनी छोटी सी उम्र में बच्चों के कंधों पर और उनके दिमाग पर कितना खराब प्रभाव पड़ रहा है इसका आकलन कलेक्टर साहेब क्यों नही कर रहे है। आखिर कैसे बच्चें एक दिन में 10, 12 किताबों को पढ़ेंगे? बच्चों को सिखाया जा रहा है या फिर बच्चो को रट्टू तोता बनाया जा रहा है? क्या ये रटकर पढ़ने वाले बच्चे बड़े होने पर कोई प्रतियोगिता परीक्षा पास कर पाएंगे? बच्चे देश का भविष्य होते है, रटकर पढ़ने वाले बच्चे क्या तर्कशक्ति का जवाब दे पाएंगे? ऐसे और भी कई सवाल है जिनका जवाब जिला गौतम बुद्ध नगर के कलेक्टर साहेब को देना चाहिए। हम अपेक्षा करते है कि DM साहेब हमारे सवालों के जवाब जल्द से जल्द देंगे।