तलेन - ( सतीश यादव )कहते है चमतकार को नमस्कार होता है हम आपको बताते हैं तलेन के समीप एक ऐसा सद्गुरु आश्रम जहाँ पर विगत 45 वर्षो से मेला लगता आ रहा है मौका होता कार्तिक पूर्णिमा का कहते यहाँ पर श्री गुरु विश्वम्भर नाथ जी ने इसी कार्तिक पूर्णिमा को 1977 में समाधि ली जब से ही यहाँ पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन मेला लगता आ रहा है वही यहाँ पर पूजा अर्चना करने वाले की मन की मुराद पूरी हो जाती है श्री गुरु महाराज विश्वम्भर नाथ जी तलेन में एक शिक्षक के रूप में आये थे जहाँ कुछ वर्षों तक बंगला शाला प्रथमिक विद्यालय में अध्यापन का कार्य किया वही यह भगवान शिव के भक्त थे जो उगल नदी के किनारे कुटिया बना कर भगवान शिव की पूजा अर्चना करते थे नगर से जो कुछ मिलता था उसी में उनका गुजर बसर कर लेते थे इनके चमत्कारों की बात करे तो कई बार साँप लिपटे हुई ध्यान करते हुए देखा गया शेर व कई जानवर इनके आसपास भटकते रहते थे खरबूजा गायब हो जाता था वही इनके समाधि के पश्यात नगर के सहयोग से एक छोटा सा आश्रम उगल नदी के किनारे बनाया गया जब से ही यहां कार्तिक पूर्णिमा को मेला लगता आ रहा है वही पूर्णिमा के दिन दूर दूर से श्रद्धालुओं का तांता दिन भर लगा रहता है व भजन कीर्तन व यज्ञ हवन पूजा पाठ चलती रहती है प्रसादी वितरण होता है वही गुरु विश्वभर नाथ जी मूलतया राजगढ़ जिले के सुठालिया के निवासी थे जहाँ उनका भरा पूरा परिवार रहता है ।
एक ऐसा देव आश्रम जहाँ विगत 45 वर्षो से लग रहा एक दिन का मेला होते है कई चमत्कार