अयोध्या: सियासी सरगर्मी बढ़ने का कारण राम मंदिर निर्माण को लेकर होने वाली बैठक बताया जा रहा है।
3 जून को राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई है। बैठक में बजरंग दल और राम मंदिर से जुड़े साधु-संतों को आमंत्रित किया गया है।
वहीं बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी का कहना है कि न्यायालय का जो भी फैसला होगा, उसे सभी मानेंगे और इस तरह की बैठक का कोई मतलब नहीं है।
बता दें कि राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अयोध्या में तीन सदस्यीय मध्यस्थता कमेटी सभी पक्षकारों से मिलकर सुझाव ले रही है। वही 3 जून को राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में एक राजनीतिक बैठक आयोजित की गई है। इसमें बजरंग दल और राम मंदिर से जुड़े साधु-संतों को आमंत्रित किया गया है। वहीं श्री रामलला विराजमान १९४९ के पक्षकार अखिल भारत हिंदू महासभा के वरिष्ठ नेता प्रमोद पंडित जोशी ने कहा है कि, सुप्रीम कोर्ट इस लैंड डिस्प्यूट का निर्णय देगा। जबकि, बाबर का हुकुम नामा पानेवाले श्री पंच रामानंदीय निर्मोही आखाडा के साथ १९३४ से हिंदू महासभा है। और ७८ वीं बार श्रीराम मंदिर निर्मोही आखाडा को लौटाने को संकल्पबद्ध है ! अतः ऐसी बैठक का कोई औचित्य नहीं है।
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