वीर भूमि खिंदौड़ा के परशुराम कालीन शिव मंदिर में सनातन धर्म की रक्षा और सम्पूर्ण मानवता के शत्रु इस्लामिक जिहाद की कामना से किये जा रहे माँ बगलामुखी महायज्ञ व श्रीमद्भागवद कथा के 6 वें दिन बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आज कथा का अंतिम दिन है।महायज्ञ की पूर्णाहुति कल होगी और महायज्ञ के बाद त्यागी समाज के आमंत्रण पर हिन्दुओ की सभी 36 बिरादरियों की महापंचायत आहूत की जायेगी। कथा औऱ महायज्ञ में मातृ शक्ति की उपस्थिति उल्लेखनीय रही है।

जिन पाखंडियों ने सनातन धर्म को तहस नहस किया

अन्याय के लिए ईश्वर प्रदत्त दण्ड तो उन्हें भोगना ही पड़ेगा

कथा में आज कथावाचन कर रहे अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रिय संयोजक यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज गीता के माध्यम से बताया की कुछ कायर और पाखण्डी लोगो ने सनातन धर्म के मूल सिद्धांतो को तोड़ मरोड़ कर सनातन धर्म को तहस नहस कर दिया।हमारे धर्म में हिंसा और अत्याचार को सहन करने वाले को ब्रह्महत्या से भी बड़े पाप का भागी बताया गया है।अर्जुन को माध्यम बनाकर योगेश्वर श्रीकृष्ण ने हमे बताया है की धर्म की विजय के रास्ते में आने वाले किसी भी व्यक्ति चाहे वो कितना भी ज्ञानी और गुणवान क्यों न हो,का वध करना सच्चे धर्मयोद्धा का दायित्व है।कर्ण और भीष्म पितामह जैसे महापुरुष जो गुणों की खान थे,उनका वध केवल इसी कारण किया गया की वो अधर्म के साथ थे।हमारे धर्म में स्पष्ट बताया गया है की जिस कार्य से किसी निर्दोष का हनन होता हो या उसकी हानि होती हो,उस कार्य को हिंसा कहते हैं। समाज से हिंसा को दूर करने के लिये जो पुरुषार्थ किया जाता है,उसे ही अहिंसा कहते हैं।हमारा धर्म कहता है की जो सक्षम होने पर भी अन्यायी को उचित दण्ड नहीँ देते,वो वस्तुतः उस अन्याय के भागीदार होते हैं और उस अन्याय के लिये ईश्वर प्रदत्त दण्ड उन्हें भी भोगना पड़ेगा।एक हिसक व्यक्ति को दण्ड न देने वाला राजा या प्रधान उसके द्वारा की गयी सभी तरह की हिंसाओं का दोषी होता है।ईश्वर में विश्वास रखने वाले प्रत्येक सनातनी व्यक्ति का कर्तव्य है की वो अपनी क्षमताओं के अनुरूप वो हर अन्याय,अत्याचार और हिंसा का विरोध करे।जो ऐसा नही करता उसे स्वयं को श्रीराम,श्रीकृष्ण,परशुराम और बजरंग बली जैसे सनातनी महापुरुषों से स्वयं को जोड़ने का अधिकार नहीँ है।

बाबा परमेन्द्र आर्य और शिवमन्दिर के महंत यति रामानन्द सरस्वती जी महाराज ने उपस्थित जनसमुदाय से यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज की बात सुनने और उसको पूरा करने का आह्वान किया।