इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आई.सी.एम.आर.) ने बड़ी कामयाबी के साथ "हीमोफीलिया" नामक बीमारी का पता लगाने वाली विश्व की सर्वप्रथम और बेहद सस्ती रैपिड डायग्नोस्टिक किट ईजाद कर ली है। अब हीमोफीलिया-ए और रक्त से जुड़ी अन्य बीमारियों का बड़ी ही आसानी से पता चल सकेगा। इस बीमारी का पता लगाने के लिए जो टेस्ट होगा उसके लिए जांच फीस बतौर हॉस्पिटल में महज 50 रुपये तक ही खर्च करने होंगे।

अब केवल 10 मिनट में हो जाएगा हीमोफीलिया-टेस्ट

टेस्ट रिपोर्टर के लंबे इंतजार के बाद अब स्पेशलिस्ट के पास भटकना भी हुआ ख़त्म

भारत के सभी प्रायमरी हेल्थ सेंटरों पर आसानी से हो सकेगी हीमोफीलिया की जांच

हीमोफीलिया को ऐसे जानें

आपको बताना जरूरी है हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है जिसकी वजह से मनुष्य के शरीर मे खून का थक्का बनना बंद हो जाता है। और शरीर से होने वाली ब्लीडिंग थमने का नाम नहीं लेती है । वैसे तो शरीर का कोई भाग कहीं से कटने के कुछ देर बाद उस जगह पर खून का थक्का अपने आप बनना शुरू हो जाता है, और ब्लीडिंग थम जाती है। जबकि हीमोफीलिया में ऐसा नहीं होता बल्कि इससे पीड़ित-पेशेंट की ब्लीडिंग लगातार होती ही रहती है। इसलिए सतर्कता के तौर पर भी इस बीमारी का सामने आना बेहद आवश्यक है।

बताते चलें कि हीमोफीलिया टेस्ट के नाम पर पहले हेल्थ केयर सेंटर पर स्पेशलिस्ट/डॉक्टर्स हीमोफीलिया का पता लगाने के लिए बतौर जांच फीस 5 से 10 हजार झटक लेते थे। और मरीज को लंबे इंतजार के बाद बीमारी का पता चलता था । लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, मरीज को सस्ते और विश्वसनीय तरीके से अपनी आंखों के सामने आसानी से बीमारी की जानकारी मिल जाएगी।

ऐसे होगी हीमोफीलिया की जांच

समूचे भारत वर्ष में प्रत्येक प्राथमिक उपचार केंद्र पर उपलब्ध होगी हीमोफीलिया डायग्नोस्टिक किट। किट पर मरीज के खून की बूंद टपका देने के 10 मिनट बाद ही टेस्ट रिपोर्ट सामने आ जायेगी और पेशेंट को बीमारी का पता चल सकेगा.

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