होशंगाबाद: कब होगा सख्ती से जिला कलेक्टर के आदेशों का पालन ?
जिम्मेदारों के आदेशों की अवहेलना पर भी नहीं हो रही कार्यवाही ?
आखिर कार्यवाही का निर्धारण करेगा कौन?
शिक्षा की आड़ में कब तक पालकों की जेबें यूँ ही कटती रहेगी?
क्यों नहीं थम रहा पालकों से लूट का सिलसिला?
प्रयावेट स्कूलों से डीईओ की सांठगांठ पर कब तक यूं ही मौन रहेंगे जिले के भारसाधक अधिकारी?
सवाल यह भी है जिन स्कूलों को डीईओ ने जांच में दोषी पाया उन पर कार्यवाही अब तक क्यों नहीं? कब और कौन करेगा ?
प्रयावेट स्कूल एसोशिएशन ने पालकों की शिकायत पर अबतक कितने स्कूलों को दिया अल्टीमेटम ?
इन तमाम सवालों के जवाब अब 2019 में ट्रांसफर हो चले हैं । जिले के स्कूलों से सेटिंगबाजी के चलते अभी तक डीईओ की कार्यप्रणाली ने जिले की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के बजाय उल्टा वेंटिलेटर तक पहुंचा दिया है। सूत्रों ने यह भी खुलासा किया है पिछले कलेक्टर भी डीईओ को लेकर कुछ नहीं कर पाए! होना डीईओ का ट्रांसफर था और हो गया कलेक्टर साहब का! खैर अब देखना यह है आखिर भ्रष्टाचार में लिप्त डीईओ पर भ्रष्ट आचरण निवारण अधिनियम की कार्यवाही होगी भी या नहीं?
प्रतिवर्ष शिक्षण सत्र प्रारंभ होते ही तामम नियम कानूनों को ताक में रखकर निजी विद्यालयों की मनमानी शुरू हो जाती है। बेरोकटोक पालकों की जेब पर डाका डाला जाता है। सूत्रों की माने तो मोटी रकम खर्च करके ट्रांसफर रुकवाने वाले जिला शिक्षा अधिकारी की मिलीभगत से भ्रष्टाचार को जमकर बढ़ावा दिया जा रहा। स्कूलों एवं शिक्षण सामग्री विक्रेताओं की सांठगांठ पर कई सवाल उठ रहे है। सूत्रों का ऐसा कहना है यदि भ्रष्ट डीईओ को इस कार्यालय से नहीं हटाया गया तो नए शिक्षण सत्र 2019 का भी बंटाढार तय समझो!
बताते चलें कि जिला कलेक्टर आदेशों का पालन यदि ईमानदारी से हो जाये तो निजी विद्यालयों की मनमानी पर रोक लग सकेगी, और जिले के पालक लूटने से बचकर राहत महसूस कर सकेंगे