ये जो सप्ताह अभी चल रहा है । यानि कि 20 दिसम्बर से 27 दिसम्बर तक | इन्ही 7 दिनों में गुरुगोबिंद सिंह जी का पूरा परिवार शहीद हो गया था ।

आओ आपको बलिदान की एक मिसाल से अवगत करवाते है । इतिहास में शायद ही ऐसी कोई मिसालें मिलेंगी । जब किसी पिता ने कौम के लिए राष्ट्र के लिए इस्लाम के अत्याचारो के खिलाफ एक सप्ताह में अपने 6,8,14 व 17 वर्ष के 4 बच्चों का जीवन धर्म रक्षा मे कुर्बान कर दिए हो ।

#21दिसंबर

श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने परिवार सहित श्री आनंद पुर साहिब का किला छोड़ा ।

#22दिसंबर

गुरु साहिब अपने दोनों बड़े पुत्रो सहित चमकौर के मैदान में पहुंचे और गुरु साहिब की माता और छोटे दोनों साहिबजादों को गंगू नामक ब्राह्मण जो कभी गुरु घर का रसोइया था उन्हें अपने साथ अपने घर ले आया ।

चमकौर की लड़ाई शुरू और दुश्मनों से जूझते हुए गुरु साहिब के बड़े साहिबजादे श्री अजीत सिंह आयु केवल 17 वर्ष और छोटे साहिबजादे श्री जुझार सिंह आयु केवल 14 वर्ष अपने 11 अन्य साथियों सहित देश और धर्म की रक्षा के लिए वीरगति को प्राप्त हुए ।

#23दिसंबर

गुरु साहिब की माता श्री गुजर कौर जी और दोनों छोटे साहिबजादे गंगू ब्राह्मण (जन्म से योग्यता से नहीं) के द्वारा गहने एवं अन्य सामान चोरी करने के उपरांत तीनों को मुखबरी कर मोरिंडा के चौधरी गनी खान और मनी खान के हाथों गिरफ्तार करवा दिया गया और गुरु साहिब को अन्य साथियो की बात मानते हुए चमकौर छोड़ना पड़ा ।

#24दिसंबर

तीनों को सरहिंद पहुंचाया गया और वहां ठंडे बुर्ज में नजरबंद किया गया ।

#25और26 दिसंबर

छोटे साहिबजादों को नवाब वजीर खान की अदालत में पेश किया गया और उन्हें धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव दिया गया ।

नवाब वजीर खां ने फिर पूछा इस्लाम कबूल करोगे, नहीं तो मार दिए जाओगे । छोटे साहिबजादे फ़तेह सिंह जी आयु 6 वर्ष ने पूछा अगर मुसलमान हो गए तो फिर कभी भी नहीं मरेंगे न ? वजीर खां अवाक रह गया उसके मुह से जवाब न फूटा ।

तो साहिबजादे ने जवाब दिया कि जब मुसलमान हो के भी एक दिन मरना ही है तो अपने धर्म में ही अपने धर्म की खातिर क्यों न मरे ।

#27दिसंबर

साहिबजादा जोरावर सिंह उम्र महज 8 वर्ष और साहिबजादा फतेह सिंह आयु केवल 6 वर्ष को तमाम जुल्म के उपरांत जिंदा दीवार में चीनने उपरांत जिबह (गला रेत) कर हत्या किया गया और खबर सुनते ही माता गुजर कौर ने अपने साँस त्याग दिए ।

इधर भारत Christmas के जश्न में डूबा एक दूसरे को बधाइयां दे रहा है । एक ज़माना था जब यहां पंजाब मे इस हफ्ते सब लोग ज़मीन पे सोते थे क्योंकि माता गूजरी ने वो रात, दोनों छोटे साहिबजादों के साथ, नवाब वजीर खां की गिरफ्त मे,  सरहिन्द के किले मे ठंडी बुर्ज मे गुजारी थी |

यह सप्ताह सिख इतिहास में शोक का सप्ताह होता है पर आज देखता हूँ कि पंजाब समेत पूरा भारत जश्न में डूबा है??

गुरु गोबिंद सिंह जी की कुर्बानियों को इस अहसान फरामोश मुल्क ने सिर्फ 300 साल में भुला दिया । जो कौमें अपना इतिहास अपनी कुर्बानियाँ भूल जाती हैं वो खुद इतिहास बन जाती है ।

ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਦੇ ਖਾਲਸਾ ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਦੇ ਫਤਿਹ..

आजाद

इतिहासकार की कलम से