होशंगाबाद: करोड़ों की रेत रॉयल्टी, अवैध उत्खनन के नाम पर होने वाली गाढ़ी कमाई से जिला प्रशासन का पेट भरता दिखाई नहीं दे रहा है। दिनरात अंधाधुंध रफ्तार से दौड़ते (10 चक्का यमराज) डंफरों से आये दिन होने वाली मौतों का ग्राफ थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्थानीय प्रशासन के निकम्मेपन का खामियाजा सड़क पर चलने वाले निर्दोष अपनी जान गंवा कर उठा रहे हैं।
आखिर कब तक लोगों के घरों में यूँ ही मातम छाया रहेगा ? जनता पूछ रही है।
आपको बता दें कि बांद्राभान रेत खदान को जाने वाली सड़क पर दौड़ रहे डम्फर ने एक और सवारी ऑटो को रौंदते हुए फिर से 3 लोगों को मौत की नींद सुला दिया है। घटना से आक्रोशित भीड़ ने डंफर को आग के हवाले कर करते हुए दुर्घटना को लेकर स्थानीय प्रशासन की लापरवाही पर निशाना साधा है।
अब सवाल यह उठता है
1. आखिर कहाँ है RTO का स्पीड गवर्नर ?
2. आखिर क्यों नहीं होती वाहनों में स्पीड गवर्नर की जांच?
3. क्या मोटर मालिकों से नजराना वसूली करके सड़क पर आम जनता को मरने के लिए छोड़ दिया गया है?
या यूं कहें कि तमाम नियम कानून सबकुछ महज़ दिखावा है और दफ्तरों की चौखट तक ही फाइलों में सिमट कर रह गए हैं?
बहरहाल होशंगाबाद की अवाम जानना चाहती है आखिर कब तक मासूम बच्चों,महिलाओं,युवाओं और बुजुर्गों को डंफरों से यूँ ही कुचलकर मौत मिलती रहेगी? साक्षात 10 चक्का यमराज सड़क पर बेख़ौफ घूमते देखा जा सकता है। आश्चर्य की बात तो यह है कि नगर की सीमा से गुजरने वाले कई डंफरों के आगे-पीछे गाड़ी नम्बर तक नहीं लिखे होते । बावजूद इतने के भी स्थानीय प्रशासन अपनी आंखों पर अंधत्व का चश्मा चढ़ा लेता है और जानबूझकर अंधेपन का ढोंग करता है।
इसी तरह सड़क दुर्घटना होती रही तो वो दिन दूर नहीं जब आम जनता के सब्र का बांध फूटकर उग्र आंदोलन का रूप धारण कर वाहनों से लेकर दफ्तरों तक को आग के हवाले कर देगा । दुर्घटना से नाराज नगर की जनता का कहना है डंफरों पर सख्ती से रोक लगाई जाय और इन्हें नगर की सीमा से तत्काल बहार किया जाय। अन्यथा आम जनता के सड़क पर उतरने के बाद तमाम जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।