रामलला विराजमान 1950 पक्षकार अखिल भारत हिंदू महासभा के वरिष्ठ नेता प्रमोद पंडित जोशी जी ने स्पष्ट किया है कि इकबाल अंसारी अपने शब्दों को कब पलट दे, इसका भरोसा नहीं।परंतु यह अधिवक्ता कपिल सिब्बल की मांग को दोहराती भाषा लगती है। हिंदू महासभा ने इकबाल को सुझाव दिया है कि, "सुप्रीम कोर्ट में आवेदन करे।"

हाशिम अंसारी ने सुन्नी वक्फ के निर्देश पर,1962 में, अखिल भारत हिंदू महासभा पर मुर्तिया रखने का आरोप लगाकर उन्हें निकालने की याचिका लगाई थी। जब कि,1950 वाद में इस ही आरोप में छह हिंदू महासभाई संत निर्दोष छूटे थे। श्रीराम जन्मभूमि स्थित मंदिर का कब्जा छोडने का बाबर का हुकुमनामा लेकर मीर बांकी आया था। श्री पंच रामानंदीय निर्मोही आखाडा महंत श्यामानंद ने अमान्य किया तब उनको मारकर मंदिर विध्वंस और उस ही मलबे से 14 स्तंभों पर पुनर्निर्माण के प्रमाण मिले है।

राम मंदिर समर्थकों को हिंदू महासभा ने आवाहन किया है कि,77 बार हिंदुओं ने लडकर मंदिर मुक्त कर श्री पंच रामानंदीय निर्मोही आखाडा को लौटाने के साक्ष्य 17 राष्ट्रीय मुसलमानों ने न्यायालय में दिए है। ऐसे में रावण या बाबर जैसी मानसिकता से समाधान नही होगा।राजनीतिक-आर्थिक लाभ का आखाडा बनाकर संरक्षित मंदिर तोडनेवाले हिंदुओं से क्षमा मांगे। गोस्वामी तुलसीदास, समर्थ रामदास जिस आखाडे से है उस निर्मोही आखाडे ने अनेक बलिदान दिये है।झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को अंतिम समय तक सशस्त्र संघर्ष के साथ बलिदान दिया है। वादी-प्रतिवादी एक मंच पर मंदिर के समर्थन में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में आवेदन कर सौहार्दपूर्ण वातावरण में, 78वी बार निर्मोही आखाडा को 67:77 एकड भूमी का हस्तांतरण करे।

राष्ट्रीय प्रवक्ता

प्र.प.जोशी

अखिल भारत हिन्दू महासभा