अयोध्या: श्रीराम जन्मस्थान पर राममंदिर को लेकर भाजपा को सत्ता में लानेवाले समर्थक संघ, विहिंप, शिवसेना, राजनीतिक संत मंडली जो, वक्तव्य दे रहे है या संसद से अध्यादेश की मांग कर रहे है उनका "सुप्रीम कोर्ट पर पूर्ण विश्वास है। और जमीन विवाद के रूप में, जनवरी से सुनवाई आरंभ होगी। 1950 पक्षकार अखिल भारत हिंदू महासभा ने, सुप्रीम कोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग की है।

ऐसे में, वह जानते है कि,सन 1528 में बाबर का हुकमनामा पानेवाले, महंत श्यामानंद का प्रथम बलिदान देनेवाले, सन 1885 से पक्षकार , दिनांक 14 अगस्त 1941 नजुल रेकॉर्ड श्री पंच रामानंदीय निर्मोही आखाडा के पक्ष में अधिपत्य के सभी प्रमाण है। गुरुश्री रामानंद जी महाराज द्वारा लिखित सेवा बटवारे श्रीराम जन्मस्थान-पंच रामानंदीय निर्मोही आखाडा श्री हनुमान गढी-पंच रामानंदीय निर्वाणी आखाडा श्री कनक भवन-पंच रामानंदीय दिगंबर आखाडा 17 राष्ट्रीय मुसलमानों के 1950 में दिए हलफनामे इनको देखकर निर्मोही आखाडा जमीन विवाद निर्णय जीतेंगे, फिर हमारा क्या होगा ?

रामनाम पर मिली संपत्ति-सत्ता, प्रतिष्ठा और सन्मान पर भक्त ठगे जाने का प्रमाण पा लेंगे। इस भय के साथ संसद में ऑर्डिनेंस और रावण की अपहरण मानसिकता के साथ कब्जा ! यही इनका षडयंत्र है ! राम जन्मस्थान पर 1528-1992 पहले भी मंदिर था। न्यायालय संरक्षित 200 गज राम जन्मस्थान मंदिर परिसर में गैरहिन्दू प्रतिबंधित थे।और 6 दिसंबर 1992 निर्मोही आखाडा ब्रह्मलीन महंत जगन्नाथ दास महाराज ने "मंदिर विध्वंस" की FIR लिखकर 200 करोड की भरपाई का दावा ठोका है।यह कौन भर कर देगा ?

यह भय सता रहा है।इसलिए,राजनीतिक-आर्थिक लाभ के लिए अध्यादेश का दबाव बनाकर जो अपना नही, गोस्वामी तुलसीदास,कबीरदास, रविदास, बन्दा बैरागी, समर्थ रामदास जी के रामानंदीय निर्मोही आखाडे का है ! उसे हडपना मात्र है। इसलिए ऑर्डिनेंस की मांग ।

प्रमोद पंडित जोशी,

अखिल भारत हिन्दू महासभा