कंपनी के कर्मचारियों को 4 महीने से नहीं मिला वेतन।
तमाम सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतज़ामात की पहचान का मोहताज कब रहा है SPM लेकिन समय बीतने के साथ अधिकारियों के रिटायरमेंट के बाद भी अब तक कुछेक कंपनियों की मनमानी बरकरार है।
विश्वसनीय सूत्रों की माने तो SPM में कई कंपनियां की मनमानी धड़ल्ले से बदस्तूर जारी है । व्यवस्थाएं खुद ही हालात बयां कर रही है कारखाने में होने वाले प्रोडक्शन पर ख़रीद फ़रोख्त, कर्मचारियों का लेखाजोखा एवं लेनदेन इत्यादि पर लगने वाले जीएसटी का कार्य एक निजी कंपनी की देखरेख में हो रहा है ।
दरअसल कारखाने के अधिकांश नियमित कर्मचारियों में योग्यता की कमी बताई जा रही है । कुछेक 8वी फेल भी हैं जो लिखापढ़ी में थोड़े कमजोर हैं । इस वजह से बाहरी कंपनी को जीएसटी कार्य ठेके पर दिया गया है । ऐसा सूत्रों का कहना है ।
हालांकि सूत्रों का ऐसा भी कहना है कि जीएसटी कार्य कर रही कंपनी के चार कर्मचारियों को पिछले चार महीने से वेतन तक नहीं मिला है । जिसके चलते कांट्रेक्ट बेस्ड के कर्मचारियों को त्योहार मनाने की फिक्र सताने लगी है । जबकि दूसरी तरफ सूत्रों का कहना है कि कंपनियों की मनमानी के चलते विशुद्ध रूप से भ्र्ष्टाचार भी जमकर फलफूल रहा है । कांट्रेक्ट बेस पर काम करने वाले कर्मचारियों से कंपनी सुबह 9 से शाम 6 बजे तक यानी 9 घंटे ड्यूटी लेती है । इसके एवज में उन्हें सूखी सेलरी दी जा रही है वो भी बिना EPF के इसी वजह से शिक्षित बेरोजगारों के शोषण की बात भी सामने आ रही है ।
शिकायतें दबाने की पुरानी प्रथा
आपको बता दें कि पिछले जीएम साहब के कार्यकाल में प्रयावेट सिक्युरिटी एजेंसी के कर्मचारियों की तमाम शिकायतों पर SPM प्रबंधन द्वारा कोई कार्यवाही करने के बजाय मामला दबाया दिया गया था । जानकारी मांगने पर भी नहीं दी गई इसका मतलब साफ है । जबकि कुछ गंभीर मामले बतौर शिकायत पुलिस थाने तक भी जा पहुंचे लेकिन मिलीभगत के चलते रफादफा कर दिए गए ।
RTI पर गोलमोल पत्राचार
ऐसा भी नहीं है कि आवेदक के आवेदन में चाही गई जानकारी का स्पष्ट उल्लेख नहीं होता । बल्कि बिंदुवार सूचना मांगने पर भी भ्रामक पत्राचार कर दिया जाता है । सूचना छिपाने की मंशा से भ्रामक पत्राचार फितरती हैं । इससे इतना तो साफ है कि अधिनियम की अज्ञानता का प्रदर्शन करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी जा रही है । और आरटीआई एक्ट का मख़ौल उड़ाया जा रहा है ।