नरसिंहपुर : कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अभय वर्मा के निर्देश पर जिले के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सम्पत्ति विरूपण की रोकथाम के लिए कार्रवाई तेजी से की जा रही है। शासकीय भवनों, परिसम्पत्तियों जैसे बिजली व टेलीफोन के खंबे, मार्गों से लगी हुई संरचनायें, दीवारों आदि में लगे पम्पलेट, पोस्टर, होर्डिंग्स, नारे लेखन, झंडे- झंडियां हटाने की कार्रवाई की जा रही है। जिले में 6 एवं 7 सितम्बर को 705 होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर आदि हटाये गये। सम्पत्ति को विरूपित करने वाली सामग्री को हटाने का 50 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है। यह कार्य शनिवार 8 सितम्बर तक शतप्रतिशत पूर्ण कर लिया जायेगा।
विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव में 158, नरसिंहपुर में 181, गाडरवारा में 198 एवं तेंदूखेड़ा में 168 होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर, झंडे- झंडियां आदि हटाई गई हैं। जिले के 37 शासकीय भवनों से विरूपण को हटाया गया है l सम्पत्ति विरूपण की रोकथाम के लिए नगरीय निकाय स्तर पर और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग- अलग दल बनाये गये हैं, जो सम्पत्ति विरूपण की रोकथाम की कार्रवाई युद्ध स्तर पर कर रहे हैं। सभी जनपदों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी व नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी के माध्यम से ग्रामीण और नगरीय निकाय स्तर पर दस्तों का गठन किया गया है।
उल्लेखनीय है कि विभिन्न व्यक्तियों, संस्थाओं, फर्म आदि द्वारा शासकीय, अशासकीय भवनों पर नारे लिखे जाते हैं, बैनर लगाये जाते हैं, पोस्टर चिपकाये जाते हैं, विद्युत एवं टेलीफोन के खंबों पर प्रचार- प्रसार संबंधी झंडियां लगाई जाती हैं। इस कारण से शासकीय/ अशासकीय सम्पत्ति का स्वरूप विकृत हो जाता है। इस संबंध में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विस्तृत निर्देश जारी किये गये हैं। इस बारे में मध्यप्रदेश सम्पत्ति विरूपण अधिनियम 1994 प्रभावशील है। इस अधिनियम में प्रावधान है कि जो कोई भी सम्पत्ति के स्वामी की लिखित अनुज्ञा के बगैर सार्वजनिक दृष्टि में आने वाली किसी सम्पत्ति को स्याही, खड़िया, रंग या किसी अन्य पदार्थ से लिखकर या चिन्हित करके उसे विरूपित करेगा, तो उसे एक हजार रूपये तक के जुर्माने से दंडित किया जा सकेगा। इस अधिनियम के अधीन दंडनीय कोई भी अपराध संज्ञेय होगा।