नई दिल्ली : भारतीयों सावधान! देश के प्रत्येक नागरिक को ये जानकर हैरानी होगी आपके डिजिलॉकर एप में किसी और के अहम दस्तावेज भेजे जा रहे हैं । अब सवाल यह है यदि आपके डिजिलॉकर में किसी और के दस्तावेज आये कहाँ से ? कहीं न कहीं गोपनीयता पर सवाल है अखिर ऐसा कैसे संभव है ? लेकिन यह शत प्रतिशत पूर्ण सत्य है ।

             आपको बात दें कि डिजिटल इंडिया के सपनों को साकार करने वाली मोदी सरकार आखिर किस दृष्टिकोण से डिजिलॉकर का प्रचार कर रही है ? क्या बड़े पैमाने पर भारतीयों के दस्तावेजों की हेराफेरी हो रही है ? या काबिज सरकार को खुद भी इस बात की जानकारी नहीं है ? आखिरकार गोपनीयता में सेंध मारने वालों ने अब सीधे तौर पर मोदी सरकार को बड़ा चैलेंज किया है।

              इस एप्स में आम नागरिकों के दस्तावेज रखे जाते है ताकि जरूरत पड़ने पर आम नागरिक अपने दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सके। जैसे यदि ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत है आम नागरिकों को, तब आम नागरिक ट्रैफिक पुलिस को डिजिलॉकर के दस्तावेज दिखा सकता है। कागजों को संभाल के रखना कठिन होता है इसलिए मोदी सरकार डिजिलॉकर की सुविधा लेकर आयी ताकि कम समय मे सभी दस्तावेज एक ही जगह से देखे जा सके। साथ ही इस app में यह भी सुविधा है कि आप किसी भी विभाग से अपने दस्तावेज को प्राप्त कर सकते है।

             लेकिन क्या होगा तब, जब आम नागरिक को पता चले कि उसके दस्तावेज को कोई और देख रहा है। क्या आम नागरिक इस डिजिलॉकर apps पर विश्वास कर पायेगा जब उसे पता चलेगा कि उसके दस्तावेज को कोई और देख रहा है?

             क्या फायदा इस डिजिलॉकर का जब दस्तावेज लीक हो जाये? क्या वर्तमान मोदी सरकार आम नागरिकों के दस्तावेजों को बेच रही है या फिर मोदी सरकार को मालूम ही नही है कि आम नागरिकों के दस्तावेज लीक हो रहे है?

अब सवाल यह है कि मोदी सरकार आखिर किस तकनीक पर काम रही है कि दस्तावेज लीक हो रहे है? क्या इसी तरह भारत Digital India बनेगा? यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब अब मोदी सरकार को देना है।