नई दिल्ली : ताजमहल के रखरखाव के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त लहजे में सरकार से कहा कि ताजमहल को सैकड़ों सालों तक सुरक्षित और संरक्षित रखने के उपाय करने में कोताही बरती जा रही है और इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता l
देश की शीर्ष अदालत ने कहा कि इसे देखने के दो नजरिए हैं l पहला तो यह कि ताजमहल को कैसे सुरक्षित रखा जाए और दूसरा यह कि प्रदूषण से यमुना और ताज को कैसे मुक्त रखा जाए, यानी कारखानों से वायु और यमुना को बचाना आदि l ताज की सुरक्षा और संरक्षा के लिए प्रदूषण और हरित क्षेत्र जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए व्यापक परिप्रेक्ष्य में दृष्टिपत्र तैयार करना चाहिए क्योंकि इस धरोहर के संरक्षण के लिए दूसरा अवसर नहीं मिलेगा l
सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि निश्चित ही इस मामले में ताजमहल को केंद्र में रखते हुए ही विचार करना होगा, लेकिन इसके साथ ही दृष्टिपत्र तैयार करते समय वाहनों के आवागमन, ताज ट्राइपेजियम जोन में काम कर रहे उद्योगों से होने वाला प्रदूषण और यमुना नदी के जल स्तर जैसे मुद्दों पर भी गौर करना चाहिए l