इटारसी: कटनी/भुसावल पैसेंजर से जलाऊ लकड़ी के गठ्ठे ढोने वाले महिला पुरुषो पर हुई कार्यवाही। 2 दर्जन से ज्यादा जलाऊ लकड़ी के गठ्ठे जप्त करने की कार्यवाही आर.पी.एफ. द्वारा किये जाने की खबर है l बेचारे फटेहाल गरीब जिसमे कई बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल है l आधी रात में जंगलो जा कर खूंखार जंगली जानवरों के बीच बिना जान की परवाह किये अपना व अपने मासूम बच्चों का पेट पालने के लिए सूखे पेड़ों से लकड़ी काट कर लातें है। कई किलोमीटर पैदल सर पर गठ्ठे ढो कर शहर तक आते है वो भी मात्र डेढ़ दो सौ रुपयो की खातिर। इन रुपयों से इनका और इनके मासूम बच्चो का एक टाइम पेट भर पता है।
सरकार की योजनाएं इन फटेहाल मज़दूरों से कोसों दूर है। कई बुजुर्ग गरीब महिलाएं खुद लाठी का सहारा लेकर गठ्ठा ढो कर लातीं है केवल अपने गरीब परिवार का पेट भरने के लिए औऱ तन ढकने के कपड़ो लिए। पर कुछ राक्षस रूपी बर्दीधारी इन बेचारे गरीबो से भी रोज दस बीस रुपये ले लेते है। जबकि सूत्रों की माने तो ये बर्दीधारी स्टेशन से रोज 2 से 3 लाख की कमाई करने वाले उन अबैध बेंडरों के आकाओं तथा बड़े सागोन तस्करों के तलवे चाटते है। पैर पड़ते है,खुशामद करते है जो अब करोड़पति हो गये है खुदके ट्रकों में सागोन तस्करी कर रहे है। क्योंकि ये सागोन तस्कर बड़े राजनीतिक दलों से जुड़े हुए है l तथा सागोन तस्करी से कमाई हुई काली लक्ष्मी इनके रसूख को और दमदार बनाये हुए है।
काश-कभी इन सागौन के जंगल लीलने वाले सफेदपोश लकड़ी माफियाओं पर भी कार्यवाही हो पाती?