होशंगाबाद :  नर्मदापुरम् संभाग कमिश्नर उमाकांत उमराव के नेतृत्व एवं मार्ग दर्शन में नर्मदापुरम् संभाग के होशंगाबाद, हरदा और बैतूल जिलों में संचालित हिरण्यगर्भा मातृ मुस्कान अभियान के माध्यम से मातृ-शिशु मृत्यु दर में आशातीत कमी आई है। जिससे 7 माहों के अंदर लगभग 148 से 150 हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं को पूर्णत: स्वस्थ करके सुरक्षित एवं स्वस्थ प्रसव कराये गए हैं। इस अभियान में हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की विशेष देखभाल की गई इससे उल्लेखनीय सफलता मिली। महिलाओ ने 2 से 3 किलो ग्राम के शिशुओं को जन्म दिया है। पूर्व में हाईरिस्क गर्भवती महिला 800 से 900 ग्राम के शिशु को ही जन्म दे पाती थी।

              हिरण्यगर्भा मातृ मुस्कान अभियान की जानकारी देते हुए स्वयं कमिश्नर उमराव बताते हैं कि इस अभियान के तहत संभाग के तीनों जिलों में हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं का ग्राम व वॉर्ड स्तर तक पहुंचकर सर्वप्रथम चिन्हांकन कराया जाता है। उसके पश्चात गृह भेंट कर गर्भवती महिला को उचित खान-पान एवं स्वस्थ रहने की सलाह दी जाती है। गृह भेंट के दौरान चिन्हित हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं के साथ उनके परिवार जनों से गृह भेंट कर गर्भवती का विस्तृत विवरण परिजनों को दिया जाता है। घर पर ही महिला का स्वास्थ्य परीक्षण होता है। गृह भेंट के माध्यम से महिला एवं उसके परिवार जनों को पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने की समझाइश दी जाती है। उसके साथ ही महिलाओं को नि:शुल्क दवाईयां भी उपलब्ध कराई जाती हैं। उसमें विशेष बात यह है कि प्रत्येक चिन्हित महिला से आंगनबाडी कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग का अमला सतत संपर्क बनाये रखता है।

             कमिश्नर ने बताया कि ग्राम बोडना की 22 वर्षीय हाईरिस्क गर्भवती महिला श्रीमती मलिया बाई, होशंगाबाद की श्रीमती आशा, सिवनीमालवा की नेहा और बैतूल बाजार की 24 वर्षीय राधा जैसी लगभग 2 हजार हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य विभाग, आयुष विभाग, होम्योपैथिक और अशासकीय चिकित्सकों की मदद से सुरक्षित प्रसव कराया गया है। इससे संभाग में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। साथ ही प्री-मेच्योर डिलेवरी में भी कमी आई है। जनवरी 2018 से जुलाई 2018 के मध्य 148 से 150 शिशुओं की जान बचाई गई है। कमिश्नर श्री उमराव का कहना है कि हम अपने उद्देश्य में काफी हद तक सफल रहे हैं यह अभियान संभाग में निरंतर चलता रहेगा।