होशंगाबाद :  राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की उपाध्यक्ष सुश्री अनुसुईया उईके ने शुक्रवार को प्रतिभूति कागज कारखाना एसपीएम के रेस्ट हाउस में एसपीएम में कार्यरत अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों की शिकायतों की सुनवाई की। सुश्री उईके ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जानकारी देते हुए बताया कि आयोग अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों एवं आमजनों की शिकायत पर सुनवाई करता है। आयोग के अधिकार न्यायालय के अधिकार के बराबर हैं। आयोग का गठन अनुसूचित जनजातीय वर्ग के व्यक्तियों के संरक्षण के लिए गठित हुआ है। उन्होंने कहा कि आयोग से अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्तियों को एक आशा बंधी है हम विभिन्न कार्यालयों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारी एवं कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हैं। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार के सभी विभाग आयोग से परामर्श लेते हैं और आयोग की रिपोर्ट संसद में रखी जाती है। आयोग को दीवानी न्यायालय के बराबर शक्तियां प्राप्त हैं।

             सुश्री उईके एवं आयोग के सदस्य एचके डामोर ने एसपीएम में कार्यरत अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों की संस्था के प्रति की गई शिकायत की सुनवाई की। सुश्री उईके ने कहा कि सरकारी उपक्रम में अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चाहे रोस्टर हो या ना हो अन्य पदोन्नती के मसले पर जिला प्रशासन से बात कर उचित समाधान किया जाएगा।

           सुनवाई में अनुसूचित जाति एवं जनजाति समिति के उपाध्यक्ष एसपी मेहरा ने बताया कि प्रतिभूति कागज कारखाने में जब मनमुटाव बढ़ता है तभी हम आयोग का सहारा लेते हैं। उन्होंने बताया कि गत माह आयोग में शिकायत करने पर अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के एरियर्स के भुगतान के आदेश संस्था द्वारा 31 जुलाई को जारी किए गए। उससे पूर्व संस्था ने एरियर्स देने में पक्षपात किया। प्रतिभूति कागज कारखाने द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी नहीं दी जाती है। संस्था में आरक्षण संबंधी एवं पदोन्नती संबंधी रोस्टर का पालन नहीं किया जाता है। यदि संस्था में लिखित में इसकी शिकायत की जाती है तो संस्था का जवाब रहता है कि आपके पत्र का जवाब देना आवश्यक नहीं है।

           कर्मचारियों ने बताया कि प्रतिभूति कारखाने ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति के अधिकारी एवं कर्मचारियों को भारत टकसाल मुंबई, नोएडा एवं नासिक में प्रशिक्षण के लिए नहीं भेजा जबकि इसकी मांग लंबे समय से की जा रही थी। बताया गया कि यूपीटी के गाइड लाईन के अनुसार जो कर्मचारी बाद में ज्वांइन करते हैं वो कर्मचारी पदोन्नती की दौड में पीछे रह जाते हैं। संघ के पदाधिकारियो ने वेतन विसंगति एवं अनुकंपा नियुक्ति ना देने का मामला आयोग के समक्ष रखा और बताया कि अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों को शासकीय आवास घटिया किस्म के दिये जाते हैं साथ ही संघ कार्यालय के लिए मिले आवास में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कर्मचारियों ने बताया कि 30 दिसंबर 2017 को अपग्रेडेशन मिला लेकिन एक वेतन वृद्धि कम मिली। इसके लिए पत्राचार करने पर प्रतिभूति कागज कारखाने ने कोई जवाब नहीं दिया।

         जिला अनुसूचित जनजाति संघ के कर्मचारियों ने बताया कि कर्मचारी श्री डीपी कटारे को रोस्टर के अनुसार प्रमोशन नहीं मिला यदि उन्हें रोस्टर के अनुसार प्रमोशन मिलता तो आज वे सीनियर होते। जाय दास ने बताया कि उन्हें सीनियारटी नहीं मिली इसलिए उन्हें कोर्ट का सहारा लेना पड़ा। सुश्री उईके ने उन्हें आश्वस्त किया कि क्योंकि वे अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारी हैं उनका प्रकरण अनुसूचित जाति आयोग में भेजकर निराकरण कराया जाएगा। कोर्ट के प्रकरण में उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारी कोर्ट से विड्रा कर लें और आयोग के पास आएं तो 2-3 माह में उनकी शिकायतों का निराकरण कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि आयोग एवं कोर्ट में कोई भी प्रकरण एक साथ नही चल सकते हैं।

        कर्मचारी राजाराम उईके ने बताया कि गत माह सीआरएफ के कर्मचारी के वाहन से वे दुर्घटना ग्रस्त हो गए लेकिन एसपीएम की तरफ से कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई। थाने में एफआईआर दर्ज करने पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। सुश्री उईके ने बताया कि एन्ट्रोसिटी एक्ट के तहत प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। हत्या, बलात्कार एवं अन्य अपराध पर दंड एवं मुआवजे का प्रावधान है। कर्मचारी जीवन सिंह उईके ने बताया कि उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं दिया गया जिसके कारण उनकी सीनियारटी नीचे के कम्र में खिसक गई है। सुश्री उईके ने उन्हें आश्वस्त किया कि उनका प्रकरण एसपीएम को भेजा जाएगा और सारे रिकॉर्ड एवं तथ्य बुलाकर उसकी जांच की जाएगी। एसपीएम के अधिकारियों के बयान लिये जाएंगे और यदि एसपीएम के अधिकारियों ने गलत बयान दिया तो कार्यवाही की जाएगी। पंकज उईके एवं अंजना एक्का ने बताया कि पिता एवं पति के निधन के बाद उन्हें संस्था में अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिली। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के बैकलॉग के पदों की जानकारी संस्था द्वारा नहीं दी जाती है। उन्होंने मांग की कि मिल में जब भी कोई बैठक हो तो संघ को अनिवार्य रूप से बुलाया जाए। सुश्री उईके ने कहा कि संस्था को निर्देश दिए जाएंगे कि वे बैठक में अनिवार्य रूप से संघ को बुलाएं। श्री मुकुल कन्थोरिया ने बताया कि आयोग को शिकायत करने पर भी संस्था ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनका प्रमोशन एवं इंक्रीमेंट दे दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मिल में नई नियुक्तियां नहीं हो रही हैं और जो हो रही हैं उसमें बाहरी व्यक्तियों को लिया जा रहा है।

      सुश्री उईके ने प्रतिभूति कागज कारखाने के प्रबंध संचालक श्री राकेश कुमार, डीजीएम यशपाल सिंह, राजभाषा अधिकारी श्री देवेन्द्र तिवारी एवं अन्य अधिकारियो के साथ पृथक से बैठक लेकर उन्हें फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि वे भर्ती प्रक्रिया में 22 प्रतिशत के आरक्षण रोस्टर का पालन करें। उन्होंने इस बात पर नाराजगी व्यक्त की कि कारखाने में आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया जा रहा है और कारखाने में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के व्यक्तियों की संख्या कम हैं। सुश्री उईके ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे मिल में ग्रीन वैल सेल बनाएं और सूचना के अधिकार का जवाब प्राथमिकता से देना सुनिश्चित करें। संघ कार्यालय के लिए क्वाटर दें तथा क्वाटर में फर्नीचर एवं टेलीफोन की सुविधा उपलब्ध करायें। अनुकंपा नियुक्ति के पद लंबित ना रखें। सुश्री उईके ने अधिकारियों को हिदायत दी कि वे अनुसूचित जनजातीय वर्ग के कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता रखें। सुश्री उईके ने नोटबंदी के दौरान प्रतिभूति कागज कारखाने द्वारा किए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। बैठक में सहायक मैनेजर श्रीमती पुष्पलता कुलारे, घनश्याम, मोहित कुर्राम, अतुल तोमर, विवेक शर्मा, अनुसंधान अधिकारी दीपिका खन्ना आदि मौजूद थे।