होशंगाबाद : म.प्र. विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा एवं प्रदेश के आयुष, कुटीर व ग्रामोद्योग (स्वतंत्र प्रभार), लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग राज्यमंत्री एवं होशंगाबाद जिले के प्रभारी मंत्री जालम सिंह पटेल ने शनिवार को होशंगाबाद स्थित रेशम केन्द्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान डॉ. शर्मा एवं पटेल ने कुकून से बनने वाले धागों की प्रक्रिया का अवलोकन किया। उन्होंने धागों से कपडों का ताना बाना कैसे बनता है यह देखा। कपड़ो को सिलने के लिए आड़ा एवं सीधा धागा कैसे बुना जाता है यह देखा। धागों को रील में डालने की प्रक्रिया का अवलोकन किया। पुÏष्टग देखी तथा जो धागा में बल या एेंठन देने के लिए किया जाता है उस प्रक्रिया का अवलोकन किया।
डॉ. शर्मा ने कहा कि रेशम जब तक निजी सेक्टर के दायरे में नहीं आएगा तब तक सुधार संभव नहीं हैं। उन्होंने कास्ट ऑफ प्रोडक्शन के बारे में जानकारी ली और पूछा कि जो धागा 500 रूपए मीटर का होता है उसमें कितने किलो धागा बनता है। प्रभारी मंत्री पटेल ने बताया कि रेशम से विशेष लाभ प्राप्त नहीं हो रहा है। बहुत से किसान हालांकि रेशम उद्योग में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि रेशम के लिए मौसम में ठंडक रहनी चाहिए इसलिए पचमढी रेशम के लिए मुफीद है। जिला रेशम अधिकारी अनिल पटेल ने बताया कि 9 किलो के कुकुन से 1 किलो धागा का उत्पादन होता है इसकी लागत 32 रूपए पड़ती है। रेशम विभाग नये किसानों का चयन कर उन्हें रेशम उत्पादन का प्रशिक्षण दे रहा है। एक एकड़ में शहतूत से 2 से 3 लाख रूपए तक की आमदनी किसान प्राप्त कर लेते हैं। प्रदेश में रेशम के 6 शोरूम हैं। रेशम विभाग का मुख्य उद्देश्य है कि आमजन रेशम की पहचान कर सकें।
निरीक्षण के दौरान रेशम श्रमिक श्रीमती ज्ञानवती वर्मा के नेतृत्व में महिलाओं ने विधानसभा अध्यक्ष एवं प्रभारी मंत्री को अवगत कराया कि लगातार मेहनत करने के बावजूद उन्हें मात्र 450 रूपए प्रतिदिन की मजदूरी मिलती है इसमें से भी 150 रूपए लकड़ी के गुटखे के लिए खर्च करने पड़ते हैं। महिलाओं ने प्रभारी मंत्री से मांग की कि उनकी मजदूरी की दर बढ़ाई जाए और नियमित रूप से उन्हें काम दिया जाए। उन्होंने कहा कि रेशम का काम सीजनेबल है। बताया गया कि धागा बनाने के लिए बॉयलर में स्टीम के लिए गुटका डालना पडता है जो महिलाओं के समूह को ही लाना पड़ता है। स्टीम से 45 डिग्री तापमान में धागा विकसित होता है। बॉयलर में जितना धागा निकलता है उसी अनुसार महिलाओं को भुगतान किया जाता है। महिलाओं ने बताया कि प्रति माह उन्हें मात्र 4 से 5 हजार रूपए की ही आमदनी हो पाती है जिससे घर का खर्च निकालना मुश्किल हो जाता है। प्रभारी मंत्री ने महिलाओं को आश्वासन दिया कि वे यदि समूह बनाती हैं तो विभाग महिलाओं को कुछ राहत देने का प्रयास करेंगा।
रेशम केन्द्र के निरीक्षण के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा ने विजिटर बुक में लिखा कि - रेशम केन्द्र सुचारू रूप से संचालित है। लेबर प्रोब्लम को लेकर चर्चा की जाएगी। कार्य संतोषजनक है और पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया जाए तो रोजगार बढ़ेगा। वहीं प्रभारी मंत्री ने विजिटर बुक में लिखा कि - परिसर में साफ-सफाई की आवश्यकता है। हितग्राहियों द्वारा रेट की समस्या आती है। परिसर व्यवस्थित है, रोजगार को बढ़ावा देने के लिए इसको और अधिक सुविधा देने के प्रयास किए जाने चाहिए।