नई दिल्ली : राम जन्मभूमि मामले में बौद्ध समुदाय सुप्रीमकोर्ट पहुंचा है l बौद्ध समुदाय के कुछ लोगों का सुप्रीम कोर्ट में दावा किया गया है कि विवादित जमीन बौद्धों की है, दावे के अनुसार यहाँ पहले एक बौद्ध स्थल था, हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है, मुख्य मुद्दे की सुनवाई वाली बेंच ही सुनेगी याचिका l 

           अयोध्या के विनीत कुमार मौर्य की SC में याचिका में कहा गया है कि मस्जिद से पहले उस जगह बौद्ध धर्म से जुड़ा ढांचा था, सुप्रीम कोर्ट में इस बारे में याचिका दायर की थी, याचिकाकर्ता के अनुसार ASI की खुदाई से पता चला है l 

पक्षकार १९५० हिंदू महासभा की प्रतिक्रिया-

         अलेक्झांडर पंजाब के रास्ते आया परन्तु १२ गणराज्यो ने आपसी भेद भुलाकर संयुक्त हमला कर लौटने को विवश किया l उसके पराजय को ध्यान में रखकर, रोमन-कुषाण मिनेंडर ने वैष्णवो की एकात्मता पर प्रहार करने के उद्देश्य से बुध्द मतावलंबी बनने का स्वांग किया। मगध सम्राट बृहद्रथ ने उसपर विश्वास किया और मानवरक्त प्राशी रोमन सेना का आतंक आरम्भ हुवा। स्थानीय बुध्द प्रत्याक्रमण नहीं, सहायता करेंगे इस आत्मविश्वास के साथ मिनैडर ने वैष्णव मंदिर ध्वस्त करना आरम्भ कर दिया। बदरीनाथजी की मूर्ति नारदकुंड में फेंक दी।अयोध्या-मथुरा के जन्मस्थान घेरकर ध्वस्त किये।

        समस्त घटनाओ के लिए बृहद्रथ को दोषी मानकर उसके सेनापति पुष्यमित्रने बृहद्रथ की हत्या की और रोमनों को मार भगाकर मंदिर-स्तूप खड़े किये.इसका अर्थ यह नही है की यह बौध्द स्थल से संबंधित होगा।पुष्यमित्र ने दो बार अश्वमेध यज्ञ किया। मिराशी संशोधन मंडल को अयोध्या के एक मंदिर के शिलालेख में, द्विरश्वमेध् याजिना:सेनापते: पुष्यमित्र्स्य षष्ठेन पुत्रेन केतनं कारितं ll मिला है।

       उपरोक्त हार के कारण सभी हिन्दू अपने भेद नष्ट करके संगठीत होकर तीन महीने के संघर्ष के पश्चात शुंग वंशीय राजा द्युमत्सेन ने मिनेंडर को परास्त किया और मार गिराया। फिर भी कुषाणों के आक्रमण बारंबार होते रहे, इसलिए श्रीराम जन्मस्थान पर मंदिर बनाने में बाधा आती रही। आक्रान्ता मिनैडर पर मिलिंदपन्ह ग्रन्थ लिखनेवाले आचार्यो ने उसकी अस्थियोपर कब्ज़ा करने में प्राण गवाकर भी रोमनों से आधा हिस्सा लेकर स्तूप बनाए थे। इस्लामी शासनकाल में वहा बौध्द मतावलंबियो का कब्ज़ा ही नहीं था।

१९५० पक्षकार हिंदू महासभा