नई दिल्ली : हिन्दू तालिबान शब्द को लेकर अखिल भारत हिन्दू महासभा भड़क गई है l अखंड भारत का विभाजन २७% अल्पसंख्यक के आधार पर कांग्रेस ने थोपा या नहीं ? आंबेडकरजी ने जनसंख्या अदल बदल की मांग की थी या नहीं ? प. पू.करपात्रीजी महाराज ने नेहरू से हिंदुराष्ट्र की मांग की थी या नहीं ? धर्मनिरपेक्षता के लिए आंबेडकरजी की संविधानिक समान नागरिकता नेहरु ने नकारी या नहीं ?
विघटित बहुसंख्यंक अपने ही देश में दोयम श्रेणी में असुरक्षित है। आठ राज्यों में अल्पसंख्यक !
गोवंश को राष्ट्रीय पशु घोषित इसीलिए नही किया जाता कि, यह मांग स्वा. वीर सावरकर जी ने की थी और व्यापारी सरकार मांस निर्यात के उच्चतम पायदान पर है।
मोबलिंचिंग का नाम देकर विघटित बहुसंख्यको को प्रतिकार करने पर दोष लगाया जा रहा है।
यही सरकार मंदिर को कलंक लगाकर विध्वंस करनेवाले दल की है।शिलान्यास करनेवाली कांग्रेस मौन।मंदिर जबरन अधिग्रहण पर विपक्ष मुंह में दही जमाकर बैठा है।काशी में प्राचीन परंपरागत श्रद्धास्थान तोडे जा रहे है।यह तो, बुतशिकन है और "हिंदू तालिबान" कहकर राष्ट्रीय संस्कृति की अवमानना की जा रही है। हिंदू तालिबान होते तो,१९४७ के बाद अल्पसंख्यकत्व शेष न रहता।
अखिल भारत हिंदू महासभा, राष्ट्रीय प्रवक्ता, प्रमोद पंडित जोशी