सिवनीमालवा : कहावत है कि खेती करो तो ढंग से करो वरना न करो। इस कहावत को चरितार्थ किया है सिवनी मालवा के ग्राम बनाडा के प्रगतिशील एवं उन्नतशील कृषक अशोक पटेल ने। अशोक पटेल का कहना है कि खेती करो तो तकनीकी ढंग से करो, तकनीकी ढंग से किसान यदि खेती करे तो खेती लाभ का धंधा है। सिवनी मालवा से 17 कि.मी. दूर ग्राम बनाडा के कृषक अशोक पटेल ने अपनी खेती में नए-नए प्रयोग किये हैं उन्होने अंतरवर्तीय फसल लेकर आस-पास के गांव के किसानों का संदेश दिया है कि वे अपने खेत में एक ही फसल न लगाएं अपितु अपने खेत में एक साथ दो से तीन अन्य फसल लगाएं। इससे किसान को बहुत ज्यादा लाभ मिलेगा। वे स्वयं अपनी 12 एकड की खेती में जैविक खेती कर अंतरवर्ती फसल ले रहे हैं। उन्होने अपने खेत में एक ओर गेहूं की फसल लगाई है तो दूसरी ओर चना, तुअर, मूंग, सोयाबीन, मक्का की फसल लगाकर लाभ अर्जित किया है।
प्रारंभ में अशोक पटेल ने प्रयोग के तौर पर 5 एकड खेत में हल्दी की फसल लगाई। प्रयोग सफल होने पर पुन: 15 एकड में हल्दी की फसल लगाई। उनका कहना है कि संपूर्ण प्रदेश में वे पहले ऐसे कृषक हैं जिन्होंने अपने खेत में हल्दी का उत्पादन लिया, वे गत 4-5 वर्षों से हल्दी की खेती कर रहे हैं। जहां अमूमन कृषक एक एकड में 150 क्विंटल हल्दी का उत्पादन कर पाते हैं वहीं अशोक पटेल अपनी एक एकड में जैविक तरीके से खेती कर 300 Ïक्वटल तक की हल्दी का उत्पादन करते हैं जो कि एक रिकार्ड है। उनका कहना है कि हल्दी की खेती के लिये वे खेत को पलाऊ करते हैं, फिर 10 ट्राली गोबर की खाद डालते हैं।
अशोक पटेल पशु पालक भी हैं, उनकी स्वयं की डेयरी है इसलिये गोबर की खाद उन्हें कहीं बाहर से नहीं मंगानी पडती है। उनकी डेयरी में 25 से 30 दुधारू पशु है, वे प्रतिदिन 150 लीटर दूध बेंचकर भी लाभ अर्जित करते हैं। अशोक पटेल वर्तमान में जैविक खेती पर जोर देते हुए कहते हैं कि किसान जैविक खेती करे इससे धरती का उपजाऊपन बरकरार रहता है। उनका कहना है कि वे कभी भी नरवाई नहीं जलाते हैं अपितु नरवाई से भूसा बनाते हैं। श्री पटेल के ग्राम बनाडा में विगत 3 वर्षों से नरवाई नहीं जलाई गई है। पटेल ने कृषकों उत्सव फॉर्मर प्रोडूसर कंपनी बनाई है, इस कंपनी के माध्यम से वे किसानों को जैविक खेती करने की समझाइश देते हैं और किसानों को सलाह देते हैं कि वे शासन की किसान हित में संचालित सभी योजनाओं का लाभ लेवे। वे बताते हैं कि जैविक खेती करने का आइडिया 2014 में उनके मन में आया और इसके लिये उन्होंने आत्मा परियोजना के माध्यम से ट्रेनिंग ली। शुरूआत में उन्होंने प्रयोग के तौर पर एक एकड में अरहर, मूंगफली, गेहूं, हल्दी एक साथ लगाई और इसके सुखद परिणाम सामने आए।
पटेल ड्रिप एरिगेशन सिस्टम अर्थात टपक सिंचाई पद्धति से भी खेती करते हैं उन्होंने 15 एकड में मिर्च लगाकर ड्रिप एरिगेशन सिस्टम से प्रचुर उत्पादन प्राप्त किया। उन्होने बताया कि कस्टम हायरिंग में 40 प्रतिशत की मदद कृषि अभियांत्रिकी विभाग से मिली जो उनके लिये फायदेमंद रही। उन्होंने अपनी खेत की मेढो पर सागौन, बांस के 2 हजार वृक्ष भी लगाए हैं।
अशोक पटेल को जैविक खेती करने के लिये कृषि विभाग से सम्मान पत्र भी प्राप्त हुआ है। समय समय पर कृषि विभाग के अधिकारी उनके खेतों में अवलोकन के लिये आते हैं। वे प्रगतिशील कृषक के रूप इजराइल, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड आदि देशों की यात्रा कर चुके हैं। वे बताते है कि उन्होंने इजराइल में कम पानी से उत्तम खेती के गुर सीखे, तो वहीं आस्ट्रेलिया में खेती के विभिन्न आयामों को जाना तथा न्यूजीलैण्ड में फल एवं सब्जी की खेती कैसे ली जाती है यह सिखा। इन सब अनुभवों से सिखकर उन्होने केंचुआ खाद के लिये यूनिट तैयार की। वे नाडेप भी बनाते हैं तथा कृषकों से कहते हैं कि वे जैविक खेती को अपनाएं क्योंकि जैविक खेती जैव अमृत, बीज अमृत, घन अमृत है।
उनका कहना है कि कृषक निरंतर कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग एवं कृषि वैज्ञानिकों के संपर्क में रहे और अपने खेत में गोबर की खाद का प्रयोग अनिवार्य रूप से करे। कम से कम एक एकड मे जैविक खेती करे इससे धरती की उर्वरकता बरकरार रहेगी और कम से कम अपने खेत में दो क्राफ्ट अवश्य लें। खेत की मिट्टी का परीक्षण कराते रहे और स्वाईल हेल्थ कार्ड अनिवार्य रूप से बनाएं। श्री पटेल खेत अवशेष प्रबंधन भी करते हैं। अशोक पटेल के प्रगतिशील कृषक बनने से उनका परिवार भी प्रसन्न है। परिवार वालों का कहना है कि वे खेत में नए नए प्रयोग करते हैं जिसका लाभ आसपास के कृषक भी लेते हैं।