नई दिल्ली :  १९१४ मुंबई अधिवेशन में कांग्रेस ने महायुध्द के पश्चात अखंड हिंदुस्तान को दिए जाने वाले सुधार प्रस्ताव का मसौदा तैयार करने के लिए पांच सदस्य समिती बनाई थी। जिन्ना,मजरुल हक़, सीतलवाड,मोतीलाल नेहरू और पंडित मालवीय इस समिती में थे।

              मोतीलाल ने भविष्यत् संविधान में, मुसलमानों को विशेषाधिकार देने की मांग को समर्थन देने वाला प्रस्ताव तैयार किया था। ऐसा कहा जाता है कि, इस प्रस्ताव को मालवीयजी ने विरोध किया तो,सीतलवाड ने समर्थन दिया। मात्र जिन्ना-हक़ समर्थन के लिए तैयार नहीं थे ?

             कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों दलों में कार्यरत जिन्ना के समक्ष प्रश्न यह खड़ा हुआ कि,कांग्रेस के साथ सक्रीय राजनीती में रहकर हिन्दू महासभा के संस्थापक नेता मालवीय जी का समर्थन करने का ठीकरा मुझपर ना फूटे इसलिए मोतीलाल का समर्थन किया। इस पांच सदस्य समिती में बहुमत से पारित यह प्रस्ताव कांग्रेस के खुले अधिवेशन में पारित हुआ।

           मुस्लिम लीग के रहते भी कांग्रेस सेक्युलर नही, मुस्लिम पोषक राजनीति कर रही थी। परिणाम विभाजन और फिर विभाजन पुरक राजनीति ! कांग्रेस के पदचिन्हों पर भाजप भी ! समान नागरिकता के मुद्दे पर चुनाव जीतती रही भाजप, विषमता का राजनीतिक लाभ लेने में तत्परता दिखा रही है।

प्रमोद पंडित जोशी, 

राष्ट्रीय प्रवक्ता, अखिल भारत हिंदू महासभा