भोपाल : 25 अगस्त 1967 को जन्मे आलोक अग्रवाल एक राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वर्तमान में वे आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष हैं। इससे पहले वे नर्मदा बचाओ आंदोलन के प्रमुख स्तम्भ रहे हैं। नर्मदा बचाओ आंदोलन ने बड़े बांधों से हो रहे नर्मदा घाटी के विनाश के खिलाफ और इनसे प्रभावित होने वाले लाखों लोगों के पुनर्वास के लिए आदिवासी, किसान, मजदूरों का लंबा संघर्ष किया है। जनवरी 2014 में वह आम आदमी पार्टी में शामिल होकर निरंतर संघर्ष और संगठन को बढ़ा रहे हैं।
सामाजिक जीवन की शुरुआत -
आलोक अग्रवाल ने 1989 आई आई टी कानपुर से केमिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया। गाँधीवादी विचारधारा को मानने वाले आलोक आई आई टी के दिनों से ही सार्वजानिक जीवन में सक्रिय हैं। वे आई आई टी कानपुर परिसर के पास के हरिजन मोहल्ले में रहने वाले बच्चों को पढ़ाते थे। इसके बाद जब बच्चों की संख्या बढ़ी तो उन्होंने वहाँ सरकारी स्कूल स्थापित करने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने आई आई टी कानपुर परिसर में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों की शिक्षा के लिये और उन मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी के लिये भी संघर्ष किया। इस प्रकार उनके सामाजिक जीवन व संघर्ष की शुरुआत आई आई टी के समय से ही हो गयी थी।
बी.टेक की डिग्री हासिल करने के बाद आलोक आम लोगों की दशा जानने के लिये एक वर्ष पूरे देश मे घूमे। इस दौरान वह मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्र में आदिवासियों के साथ रहे, मुम्बई में झोपड़ पट्टी वालों के बीच समय बिताया, ओड़िसा में मछुआरों के पास उनका जीवन समझा। गांधी के विचारों को समझने के लिये सेवाग्राम में रहे। रविन्द्र नाथ टैगोर के दर्शन को जानने शांतिनिकेतन पहुंच गये। इस तरह वह देश भर में लोगों के बीच रहे।
इसी बीच वह नर्मदा घाटी के विस्थापितों की लड़ाई में शामिल हुए और लाखों आदिवासी, किसानों, मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करने का संकल्प लेकर नर्मदा घाटी के होकर रह गये।
नर्मदा बचाओ आंदोलन -
आलोक अग्रवाल ने 25 वर्ष का अपना पूरा जीवन नर्मदा घाटी में लोगों के संघर्ष में बिताया। उनका कार्य क्षेत्र अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, देवास, हरदा जिले रहे। बरगी बांध के जबलपुर, सिवनी व मंडला जिलों में चल रहे संघर्ष में भी उन्होंने सक्रिय सहयोग दिया।
आलोक अग्रवाल ने नर्मदा घाटी के इंदिरा सागर, ओम्कारेश्वर, महेश्वर, अपर वेदा व मान बांध के लाखों विस्थापितों के संघर्षों के अन्य साथियों के साथ नेतृत्व किया। इस लंबी लड़ाई के परिणाम स्वरूप-
◆ 5 लाख से ज्यादा लोगों को 5,000 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा मिल सका।
◆ 2002 में मान बांध आदिवासी विस्थापितों को 12 करोड़ का मुआवजा मिला।
◆ 2005 में इंदिरा सागर विस्थापितों के पुलिस व बुलडोज़र से उजाड़ने पर रोक लगवाई और 10 करोड़ का मुआवजा दिलाया।
◆ 2005 से 2012 के बीच इंदिरा सागर डैम क्षेत्र में शुरुआती सर्वे के बाद डूब में होने के बावजूद सरकार ने 8 हज़ार घरों और 5 हज़ार एकड़ जमीन को मुआवज़े से बाहर रखा था। जमीनी लड़ाई और न्यायालय के तमाम आदेशों द्वारा इन जमीन व घरों का अधिग्रहण कराया और 1000 करोड़ का मुआवजा दिलवाया।
◆ आलोक, चित्तरूपा पालित और उनके साथियों को जलसत्याग्रह की आवाज पूरे देश मे बुलंद करने का श्रेय भी जाता है। जलसत्यग्रह विरोध का एक शांतिपूर्ण तरीका है जिसमें प्रदर्शनकारी अपनी माँगों के समर्थन में पानी में खड़े होते हैं।
◆ सन 2012 में जलसत्याग्रह के कारण सरकार की ओर से ओम्कारेश्वर बांध प्रभावितों को 224 करोड़ रुपए का अतिरिक्त पुनर्वास पैकेज दिया गया। इस पैकेज के तहत किसानों को प्रति एकड़ अतिरिक्त 2 लाख रुपए और भूमिहीन परिवारों को 2.5 लाख रुपए का भुगतान किया गया।
◆ इतना ही नही ओम्कारेश्वर डैम के डूब क्षेत्र में आने वाले जंगल के 113 आदिवासी परिवारों को 11.5 करोड़ रुपए का मुआवज़ा दिलवाया गया।
◆ इसके साथ आलोक अग्रवाल और उनकी टीम के प्रयासों से मुआवज़ा भुगतान में भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई और लोकायुक्त जाँच भी कराई गयीं और दो अधिकारियों को रंगे हाथ पकड़वाया।
◆ सितम्बर 2013 में आलोक अग्रवाल और उनकी नर्मदा बचाओ आंदोलन की टीम ने इंदिरा सागर बाँध में बिना पुनर्वास पानी भरने के खिलाफ मध्यप्रदेश के तीन जिलों खंडवा, देवास और हरदा में एक साथ 6 जगह जल सत्याग्रह का नेतृत्व किया।
◆ अप्रैल मई 2015 में खंडवा जिले में आलोक अग्रवाल ने अन्य साथियों के साथ 32 दिन का ऐतिहासिक जल सत्याग्रह किया।
बिजली व पानी के निजीकरण का विरोध -
आलोक अग्रवाल बिजली और पानी के निजीकरण का भी विरोध करते रहे हैं। 2003 में उनकी नर्मदा बचाओ आंदोलन की टीम ने पूरे प्रदेश में जन संघर्ष मोर्चा (मध्यप्रदेश के सामाजिक आंदोलनों का एकीकृत समूह) के अंर्तगत "बिजली बचाओ आजादी बचाओ" आंदोलन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई। यह आन्दोलन बिजली बिलों में बढ़ोत्तरी और निजीकरण के खिलाफ हुआ था। सार्वजनिक पैसे की लूट के आधार पर खड़ी की गई महेश्वर परियोजना के खिलाफ तीखी लड़ाई कर जीत हासिल की।
बिजली के निजीकरण के विरोध में म प्र विद्युत मंडल के इंजीनियर व कर्मचारियों के बीच मुख्यालय में गेट सभाएं कीं और इंजीनियर्स के वार्षिक अधिवेशन में हजारों इंजीनियर्स को दो बार संबोधित किया। आलोक अग्रवाल ने अपने पूरे संघर्ष में जाति धर्म के भेद का कड़ा विरोध किया। उनके हर संघर्ष में हजारों लोगों ने जाति, धर्म भूलकर भाग लिया।
महिलाओं के अधिकार और समानता को स्थापित करने के लिये आलोक व साथियों ने नर्मदा आंदोलन में निर्णय प्रकिया में महिलाओं को बराबरी का स्थान दिया और यही कारण है कि आंदोलन के हर संघर्ष में महिलाओं की भागीदारी 50% से अधिक होती रही है।
सादगी व अपरिग्रह में विश्वास -
गांधी जी के सादगी व अपरिग्रह के प्रति पूर्ण निष्ठा होने के कारण आलोक जी ने कोई निजी संपत्ति नहीं रखी है। आज भी निजी संपत्ति के नाम पर उनके पास एक साइकिल भी नहीं है।
राजनीतिक सफर -
जनवरी 2014 में आलोक अग्रवाल आम आदमी पार्टी से जुड़े। 2014 में लोक सभा चुनाव में वे आम आदमी पार्टी के मध्यप्रदेश में चुनाव अभियान समिति के संयोजक थे। वर्तमान में वे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता, मध्यप्रदेश के संयोजक और राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के सदस्य हैं।
संगठन की भूमिका से आये आलोक ने पार्टी में संगठन को सबसे अधिक महत्व दिया। इसी कारण आज चुनाव के बहुत पहले ही मध्य प्रदेश की सभी 230 सीटों पर संगठन तैयार है।
बदलाव के लिए संगठन के साथ सशक्त संघर्ष जरूरी है यह मानते हुए उन्होंने प्रदेश में संगठन के माध्यम से भ्रष्टाचार, किसानी, बिजली, पानी सभी मुद्दों पर लगातार संघर्ष जारी रखा है।
मध्यप्रदेश में आलोक आम आदमी पार्टी का प्रमुख चेहरा हैं। पार्टी के 35 हज़ार से ज्यादा पूर्णकालिक कार्यकर्ता 230 विधानसभाओं में काम कर रहे हैं। बहुत जल्द प्रदेश के सभी 65,200 बूथों पर कार्यकर्ताओं का संगठन तैयार हो जायेगा।
नर्मदा पुत्र आलोक अग्रवाल के नेतृत्व में मध्य प्रदेश के आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं व नेतृत्वकर्ताओं का समूह आगामी नवम्बर 2018 के चुनाव में वर्तमान लूट व भ्रष्टाचार की व्यवस्था को हटाकर आम आदमी की व्यवस्था को स्थापित करने के लिये तैयार है।