नरसिंहपुर : जिले में कड़कनाथ मुर्गी पालन को प्रोत्साहित किया जायेगा। प्रथम चरण में अनुसूचित जाति- जनजाति के 200 हितग्राहियों को इस योजना से जोड़ा जायेगा। कड़कनाथ की अत्याधिक मांग होने के कारण मुर्गी पालकों को इसका अच्छा लाभ होता है। अपने विशिष्टगुणों और पोषण की अधिकता के कारण यह अत्याधिक पसंद किया जाता है। कलेक्टर अभय वर्मा ने कड़कनाथ मुर्गी पालन योजना को जिले में प्रोत्साहित करने के लिए संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर योजना तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में अनुसूचित जाति- जनजाति के 200 हितग्राहियों को योजना से जोड़ा जाये।
बैठक में सीईओ जिला पंचायत आरपी अहिरवार ने बताया कि मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना के अंतर्गत प्रोजेक्ट बनाया जायेगा। प्रत्येक इकाई की लागत 30 हजार रूपये होगी, जिसमें 15 हजार रूपये का अनुदान होगा। इसमें हितग्राही के लिए शेड बनाने की राशि, 15 दिवसीय 60 चूजे, औषधियां, मुर्गी दाना 270 किग्रा, बर्तन आदि सामग्री का प्रावधान होगा। हितग्राहियों को इस संबंध में आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जायेगा, जिससे वह अच्छी तरह मुर्गी पालन सकें।
उप संचालक पशु चिकित्सा सेवायें डॉ. जेपी शिव ने बताया कि कड़कनाथ मुर्गी अपने विशिष्ट गुणों के कारण पसंद की जाती है। इन मुर्गियों का मांस, रक्त, आंतरिक अंग कालापन लिए होते हैं। इन मुर्गियों के मांस में साधारण मुर्गी से 25 प्रतिशत अधिक प्रोटीन पाया जाता है। कड़कनाथ मुर्गी झाबुआ व धार जिले की मूल प्रजाति है। 20 सप्ताह से भी कम उम्र में मुर्गे का शारीरिक भार एक किलोग्राम हो जाता है। ये मुर्गियां 168 दिन की औसत आयु पर अंडे देने लगती हैं। ग्रामीण परिवेश में औसतन 80 अंडे देती हैं। मुर्गी पालक के लिए कड़कनाथ का मुर्गी पालन अधिक लाभदायक होगा।
बैठक में परियोजना प्रबंधक मप्र ग्रामीण आजीविका मिशन राजकुमार मालवीय, जिला संयोजक जनजातीय कार्य विभाग रेखा पांचाल, डॉ. नितेश जैन और पशु चिकित्सा विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद थे।