होशंगाबाद :  नर्मदापुरम संभाग कमिश्नर उमाकांत उमराव के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में नर्मदापुरम संभाग में हिरण्यगर्भा मातृ मुस्कान अभियान संचालित किया जा रहा है। यह अभियान नर्मदापुरम संभाग के होशंगाबाद, हरदा, बैतूल जिले में चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत सर्वप्रथम हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया जाता है यह चिन्हांकन ग्राम/वार्ड की आंगनबाडी कार्यकर्ताओं द्वारा किया जाता है।

             आंगनबाडी कार्यकर्ता गर्भवती महिला के घर पर जाकर महिला का शुगर, बीपी, हीमोग्लोबिन, जीडीएम, एलएमपी, चेक करती है और उसकी रिपोर्ट ब्लाक मेडिकल ऑफिस को देती है ब्लाक मेडिकल ऑफीसर रिपोर्ट का परीक्षण करते हैं और विकासखण्ड के अधीन बाल विकास विभाग के सीडीपीओ को साथ लेकर गर्भवती महिला के घर पर पहुंचकर गृह भेंट करते हैं।

            डॉक्टर एवं सीडीपीओ महिला के परिजनों जैसे सास-ससुर, पति, जेठानी, ननद आदि को समझाइश देते हैं कि महिला के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाए, महिला को पौष्टिक आहार दिया जाए। डाक्टर यह भी समझाते हैं कि महिला से कोई भी भारी कार्य न कराया जाए, हल्का व्यायाम कराया जाए। महिला को भी समझाइश दी जाती है कि यदि घर के आंगन में जगह है तो वह पोषण वाटिका लगाए। महिला को सलाह दी जाती है कि वह दिन में 6-7 बार थोडा-थोडा आहार ले, आहार में चुकन्दर, टमाटर, सलाद, मौसमी फल, हरी सब्जियां लेवे। डाक्टर गर्भवती महिला की जांच करते हैं और नि:शुल्क दवाईयां उपलब्ध कराते हैं। दी गई सलाह का सकारात्मक प्रभाव महिला एवं उसके परिजनों पर पडता है, वे महिला की पर्याप्त देखभाल का वादा करते हैं।

          डॉक्टर एवं सीडीपीओ महिला से 3-4 बार गृह भेंट करते हैं और निरन्तर परिवार 108 एंबुलेंस के संपर्क में रहता है। नियम तिथि को डॉक्टर द्वारा महिला का स्वस्थ एवं सुरक्षित प्रसव कराया जाता है। अब तक इस अभियान के अंतर्गत लगभग 1 हजार से अधिक हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं का स्वस्थ एवं सुरक्षित प्रसव कराया गया है।

         नर्मदापुरम संभाग के तीनों जिलो में इस अभियान के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं की पर्याप्त देखरेख कर सैंकडों सुरक्षित एवं स्वस्थ प्रसव जिला चिकित्सालय एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में कराए जा चुके है। हिरण्यगर्भा मातृ मुस्कान अभियान में स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर, जिला आयुष विभाग के आयुष चिकित्सक, आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं, प्रायवेट चिकित्सक भी इस अभियान में स्वेच्छा से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आंगनबाडी एवं आशा कार्यकर्ता को भी बेसिक चीजों का प्रशिक्षण दिया गया है।

        हिरण्यगर्भा मातृ मुस्कान अभियान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए नर्मदापुरम संभाग कमिश्नर श्री उमाकांत उमराव बताते हैं कि अभियान का मुख्य उद्देश्य यह है कि हम हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं को समुचित पोषण आहार देकर, उसके स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखकर एवं महिला के परिजनों की काउंसलिंग कर हाईरिस्क गर्भवती महिला को एक सामान्य व स्वस्थ महिला में तब्दील करते हैं, उसका सुरक्षित प्रसव करवाते हैं। हम इस उद्देश्य में काफी हद तक सफल रहे हैं। 

     हिरण्यगर्भा अभियान की निरंतर मॉनिटरिंग के लिये कमिश्नर उमराव के निर्देशानुसार हिरण्यगर्भा मातृ मुस्कान नाम से वाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। जब भी चिकित्सक एवं उनकी टीम हाईरिस्क गर्भवती महिला के घर पर जाती है तो उस अवसर की फोटो वाट्सएप ग्रुप पर पोस्ट करते हैं। डॉक्टर लगातार महिला के स्वास्थ्य पर निगरानी रखते हैं। परिजन 108 एंबुलेंस के संपर्क में रहते हैं। जब भी महिला को कोई स्वास्थ संबंधी समस्या आती है तो परिजन उसे उसी डॉक्टर के पास लेकर जाते हैं जो गृह भेंट के दौरान उनके घर पर आए थे।

     कमिश्नर उमराव बताते है कि हम आने वाली पीढी को 2 वर्षों में इतना चेंज कर देगे कि उसे स्वास्थ संबंधी पैरामीटर की जानकारी रहे। उस पीढी को पता रहेगा कि उसे क्या खाना है और क्या करना है। कमिश्नर का कहना है कि हम युवा वर्ग से जो अपेक्षा कर रहे हैं वह एक सामाजिक दायित्व के रूप में सामने आ रहा है। उनका कहना है कि पूर्व में हमारी फूड बास्केट बडी थी, उसमें 4-5 प्रकार की दालें एवं 8-9 प्रकार की ग्रीन वेजिटेबल होती थी। अब फूड बास्केट छोटी हो गई है। लोग 1-2 प्रकार की दाल एवं 2-3 प्रकार की ग्रीन वेजिटेबल ही खा पा रहे हैं। इससे स्वास्थ संबंधी दिक्कतें आ रही है। शीघ्र ही हिरण्यगर्भा मातृ मुस्कान अभियान का पोर्टल एवं एप भी बनाया जाएगा।