पंजाब एंड सिंध बैंक के एक बचत खाता धारक द्वारा अपने करीबी की लिमिट क्लोजिंग के समय 3 लाख २५ हजार की राशि का चेक बाकायदा दोनों तरफ हस्ताक्षर करके बैंक पहुँचकर जमा किया था l लिमिट क्लोजिंग के बाद लम्बे समय तक गुडविल में काम चलता रहा लेकिन अचानक ब्रांच मेनेजर का ट्रांसफर छतीसगढ़ होते ही तूतू-मैमै ने पूरा के पूरा मामला उजागर करके रख दिया l मीडिया में आते ही मामला कई सवालों को जन्म दे रहा है l

                बैंक ने आखिर लिमिट बंद करने के लिए जितनी राशि का चेक लिया वह कैश कैसे हो गया ? चेक की पासबुक बाई-कैश क्यूँ बता रही है ? आखिर चेक का नकद भुगतान किसने लिया ? लिमिट क्लोजिंग के नाम से अधिक राशि का चेक नाम न भरवा कर बचत खाताधारी से क्यूँ लिया गया ? यदि ऐसा है तो अब बैंकों में जमा लोकधन की सुरक्षा की जवाबदारी किसकी बनती है ?

                भलाई करने आगे आने वालों को बेहद सावधानी बरतना अब जरुरी हो गया है l या यूँ कहें की अब भरोसे की बात बैंक के साथ करने में भी शक होने लगा है l लेनदेन में पाई पाई का लेखा जोखा रखने वाली बैंक में १ लाख ५००० की हेराफेरी कैसे संभव है यह विचारणीय प्रश्न है ? लेकिन हेराफेरी से भी इंकार नहीं किया जा सकता कहीं न कहीं कुछ तो हुआ है l यहाँ अहम् सवाल यह है आखिर किसने भरोसे में सेंध लगाई ? कब दिया गया इस चीटिंगबाज़ी को अंजाम ? क्या बैंक प्रबंधन की मिलीभगत हो सकती है ? इन सारे सवालों का जवाब अब आम जनता को जानना बेहद जरुरी हो गया है l जब इस मामले में बैंक प्रबंधन से बात की गई तो सफाई देने के साथ-साथ मैनेजर साहब साफ तौर से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं l और उस पेमेंट को वापस लोटना बता रहे हैं l