होशंगाबाद :  चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जिला स्तरीय योग अभ्यास का कार्यक्रम स्थानीय शांतिनिकेतन सीनियर सेकेण्डरी स्कूल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल पटेल, कलेक्टर प्रियंका दास, नगरपालिका अध्यक्ष अखिलेश खण्डेलवाल, डीआईजी रामाश्रय चौबे, पुलिस अधीक्षक अरविंद सक्सेना, अपर आयुक्त आशकृत तिवारी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पीसी शर्मा, नगरपालिका अधिकारी अमरसत्य गुप्ता ने स्कूली बच्चों के साथ योग अभ्यास किया।

               निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रात: 6:30 बजे से योग अभ्यास आरंभ हुआ। इसके पूर्व भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के योग दिवस संदेश का सजीव प्रसारण किया गया। देहरादूर में आयोजित योग दिवस के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि योग भारत की विरासत है और हमें अपनी इस विरासत पर गर्व करना चाहिए। यदि हम अपनी इस विरासत पर गर्व करेंगे तो दुनिया भी गर्व करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि योग तन-मन को स्वस्थ रखता है। विश्व का हर देश योग को अपना मानता है योग ने सिद्ध किया है कि भारत ने इसे कैसे स्वीकारा। यदि आज योग करने वालों की संख्या जुटाई जाए तो बहुत बडी संख्या सामने आएगी जो योग करती है। पूरी दुनिया में योग की स्वीकारिता बढी है।

              प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि हम योग का नियमित प्रयोग करें तो हमारे मेडीकल के खर्च कम हो जाएंगे। आज अन्य गतिविधियों से जुडने के लिए भी योग की आवश्यकता है। श्री मोदी ने कहा कि जो लोग योग से जुडे हैं वे इसमें नियमितता लाएं और जो नहीं जुडे हैं वे योग से जुडने का प्रयास करें। योग ने पूरे विश्व को भारत के निकट ला दिया है। योग संपूर्ण मानवता को जोडने वाली कडी है जैसे सूर्य की किरणें चारों दिशाओं में फैलती हैं वैसे ही योग पूरी दुनिया में फैला है।

            होशंगाबाद जिले के शांति निकेतन स्कूल में आयोजित योग अभ्यास के कार्यक्रम में प्रार्थना के बाद चालन संचालन, स्कंध संचालन, कटी चालान क्रिया, ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्ता आसन, अद्र्धचक्रा आसन, त्रिकोणाआसन का अभ्यास कराया गया। इसके पश्चात बैठ कर किए जाने वाले आसान का अभ्यास किया गया। बज्रासन की क्रिया की गई। इसके अंतर्गत अद्र्धउत्तासन का अभ्यास सभी लोगो ने किया। इस अभ्यास को करने से कमर के दर्द में राहत मिलती है। कमर का दर्द ठीक होता है। अद्र्ध उद्दासन का अभ्यास किया गया। इस आसन को करने से दृष्टि ठीक होती है। नेत्रों की ज्योति बढती है। इसके पश्चात शीर्षासन का अभ्यास कराया गया। इस आसन को करने से तनाव व घबराहट से मुक्ति मिलती है। इसके पश्चात् उत्तान मंडुका आसन का अभ्यास सभी लोगो ने किया इस आसन को करने से पीठ एवं गर्दन की तकलीफ से छुटकारा मिलता है। चक्रासन का अभ्यास किया गया। यह आसन मधुमेय नियंत्रण में बहुत सहायक होता है। इसके पश्चात मगरासन किया गया। यह आसन शरीर एवं मन को विश्राम प्रदान करता है। भुजंग आसन तनाव से राहत दिलाता है। चरण आसन, शरीर के दंड में आराम दिलाता है।

          उक्त अभ्यास को करने के पश्चात सभी लोगों ने सेतु बंध आसन का अभ्यास किया। यह आसन अवसाद की रोकथाम में सहायता करता है। इसके पश्चात अद्र्धहला आसन किया गया इस आसन को करने से उच्च रक्तचाप की रोकथाम में सहायता मिलती है। उसके पश्चात पवन मुक्तासन का अभ्यास किया गया। इस अभ्यास को करने से पाचन क्रिया ठीक रहती है। इसके पश्चात शवासन का अभ्यास किया गया। यह आसन चिंता व तनाव को दूर करने में लाभ दायक है। सभी लोगों ने कपाल भारती के तीन चक्रों का अभ्यास किया एवं अनुलोम, विलोम प्राणायाम का अभ्यास किया। सभी लोगों ने भ्रमरी प्राणयाम का अभ्यास किया इस अभ्यास को करने से मन शांत प्रसन्न और एकांतचित रहता है।