रेहटी  :  महंगाई की मार झेल रही जनता जहां एक ओर सब्जियों के बढ़े हुए दामों की मार से त्रस्त है, वहीं दूसरी ओर बढ़े हुए दाम चुकाने के बावजूद स्वास्थ्य के अनुकूल सब्जी नहीं मिल पा रही है। सब्जी के इस व्यापार में भी अब भारी मात्रा में मिलावट का दौर आरंभ हो चुका हैं। तरोताजा दिखने वाली सब्जी को ग्राहक महंगे दाम पर भी खरीदने को तैयार हो जाता है और यह भूल जाता है कि कैमिकल से तैयार की गई यह सब्जी स्वास्थ्य भी खराब कर सकती हैं।

          महानगरों की भांति सब्जी का रंगरोगन करके और उसे तंदुरुस्त बनाकर मिलावट का धंधा चलन में आ चुका है। इस तरह की सब्जी खाकर लोग न सिर्फ अपनी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं बल्कि विभिन्न तरह की बीमारियों को भी न्योता दे रही हैं। दरअसल बाजार में बिकने के लिए रखी गई जो सब्जियां हरी और ताजी नजर आती हैं उनमें से बहुत सी सब्जियां ऐसी होती है जिन्हे खतरनाक कीटनाशक से तैयार करने के अलावा उस पर रंग भी चढ़ा होता है। सूत्रों की माने तो लौकी, करेला, भिंडी कुछ सब्जियां ऐसी हैं जिनका वजन बढ़ाने के लिए इनमें खतरनाक आक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाया जा रहा है।

फलों में भी हो रहा है धड़ल्ले से प्रयोग - 

        सब्जी की भांति फलों की स्थिति भी कोई ठिक नहीं है। सेहत के लिए फलों का सेवन किया जाता है लेकिन अधिकांश फलों में भी खतरनाक रसायनों का प्रयोग होता है। पपीता, केले, आम आदि फल रसायन से ही पकाए जा रहे हैं।

किसी भी मौसम में तैयार हो जाती है सब्जी - 

       सब्जी की पैदावार सामान्यत: मौसम की अनुकूलता को देखकर की जाती है लेकिन इस आधुनिक युग में रसायनों के सहारे किसी भी मौसम मे किसी भी प्रकार की सब्जी की पैदावार कर ली जाती है। इन दिनों हाईब्रिड प्रणाली से तैयार की गई सब्जी बाजार में चलन में हैं। हाईब्रिड प्रणाली से दो या तिन दिन में ही लौकी जैसी सब्जी के वजन में बढ़ोतरी हो जाती है। वहीं अन्य सब्जी भी बिन मौसम तैयार हो जाती है।