होशंगाबाद  :   नर्मदापुरम् संभाग कमिश्नर उमाकांत उमराव ने आज श्रम विभाग एवं नगरीय प्रशासन विभाग के कार्यों की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान उन्होंने श्रम विभाग द्वारा किए गए निर्माण श्रमिकों के पंजीयन एवं असंगठित श्रमिकों के पंजीयन के कार्यों की सराहना की और सहायक आयुक्त श्रीमती नीलम सिंह को प्रशंसा पत्र जारी करने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि 10 मई तक नर्मदापुरम् संभाग में 71 हजार 801 निर्माण श्रमिकों का पंजीयन कराया गया है। वही असंगठित श्रमिकों के पंजीयन में होशंगाबाद में एक लाख 48 हजार 831, बैतूल में 4 लाख 5 हजार 620 एवं हरदा में 54 हजार 634 श्रमिकों का पंजीयन किया गया है। बताया गया है कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को पंजीयन के पश्चात् 200 रूपए बिजली बिल प्रति माह देना होगा। श्रमिक महिला को प्रसूति सहायता, श्रमिक को दुर्घटना एवं मृत्यु होने पर सहायता आदि का प्रावधान शासन द्वारा किया गया है। कमिश्नर ने साईकिल प्रदाय योजना की समीक्षा करते हुए श्रम अधिकारियों को निर्देश दिए कि 19 मई को मुख्यमंत्री के संभावित आगमन को देखते हुए कार्यक्रम स्थल पर हितग्राहियों को साईकिल वितरण कराना सुनिश्चित करें।

              कमिशनर ने सभी नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे शासन द्वारा जारी निर्देशानुसार ही अवैध कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया शुरू करें। बताया गया कि 15 अगस्त तक अवैध कॉलोनियों को वैध करने की कार्यवाही की जाएगी। नगर पालिका अधिकारी श्री अमर सत्य गुप्ता ने बताया कि सभी स्थानों पर नगर पालिका अधिकारियो के नेतृत्व में नगर पालिका की टीम बनाई गई है जो यह पता लगायेगी कि कॉलोनी का कितना एरिया है, मालिकाना हक किसका है। इस संबंध में नोटिफिकेशन भी निकाला गया है कि कितनी कॉलोनी हैं जो हम वैध करने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि खाली भूखण्ड पर भी दावा एवं आपत्ति आयेगी जिसका परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी इस संबंध में कोई नियम नहीं आए हैं। कमिश्नर ने कहा कि जिन व्यक्तियों ने एक ही प्लॉट को बार-बार अन्य लोगों को बेचा है ऐसे व्यक्तियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाए।

             बैठक में कमिश्नर ने जल संरक्षण के लिए नगर पालिका अधिकारियो से सुझाव भी आमंत्रित किए। नगर पालिका अधिकारी श्री अमरसत्य गुप्ता ने बताया कि नगर पालिका की जल सिस्टम प्रणाली मे कुछ खामियां हैं इससे 20 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। पंप ऑपरेटर ट्रेंड नहीं हैं साथ ही आम जनता में जागरूकता का अभाव है। लोग नल खुला छोड़ देते हैं जिससे पानी लगातार बहता रहता है। बैठक में संभाग के अन्य नगर पालिका अधिकारियों ने बताया कि नल की टोंटी खुली रहने के कारण पानी की बर्बादी होती है, नदी एवं नालों की सेंटर लाईन फिक्स होनी चाहिए क्योंकि कुछ लोग सेंटर लाईन में अतिक्रमण कर खेत एवं घर बना लेते हैं। इससे पानी का प्रवाह प्रभावित होता है। इसके कारण पानी का प्राकृतिक फिल्टर समाप्त हो जाता है। अन्य नगर पालिका अधिकारियों ने सुझाव दिए कि यदि घरों में एवं हैंण्ड पंप, कुओं एवं बावडियों के पास वाटर हारवेंÏस्टग सिस्टम लगाया जाए तो पानी की बर्बादी रूकेगी एवं पानी को स्त्रोत मिलेगा। इसके अलावा नियमित रूप से नालों और नालियों की सफाई होनी चाहिए ताकि पानी का प्रभाव बना रहे। बताया गया कि पानी के स्टोरेज की समस्या है यदि सोकता कुंआ, जेट पंपों, कुंओं, नालों के आसपास बनाया जाए तो 10 से 20 फीट तक पानी जमीन के अंदर चला जाएगा। रैन वाटर हारवेÏस्टग सिस्टम घरों में कम उपयोग में लाया जाता है क्योंकि इन्हें समझने की तकनीक हर किसी को नहीं आती है। लोग इसके लिए खाली जगह छोड़ना नहीं चाहते हैं। बताया गया कि बैतूल में वाटर सिस्टम बेहतर है और बेहतर तरीके से पानी रिचार्ज होता है। अन्य नगर पालिका अधिकारियो ने सुझाव दिया कि बारिश के दौरान जल संरक्षण का अभियान चलाया जाना चाहिए साथ ही नई बन रही सड़कों में पेवर्स ब्लॉक लगाए जाने चाहिए। जो कुए समाप्त हो गए हैं उनका जीर्णोधार करना चाहिए।

             कमिश्नर श्री उमराव ने कहा कि जल संरक्षण का वह मॉडल सफल होता है जिसे लोग आसानी से ऑपरेट करते हैं। उन्होंने कहा कि जब हम नालों में स्टॉप डैम बनाते हैं तो नालों से आई मिट्टी स्टॉप डैम को चौक कर देती है। स्टॉप डैम की मिट्टी निकालना स्टॉप डैम बनाने से पाँच गुना महंगा है। नालों पर बने स्टॉप डैम पानी के रिचार्ज को चौक कर देते हैं। रैन वाटर हारवेÏस्टग सिस्टम बंद हो चुके हैं। इस सिस्टम से पानी हमेशा रिचार्ज होता रहता था।