भारत के गाँव-गाँव में कुकुरमुत्ते की तरह कब्ज़ा जमाये यह झोलाछाप डाक्टर भोले भाले ग्रामीणों के जीवन के साथ सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं l यह झोलाछाप डाक्टर हर पैथी में उपचार करने का दावा करते हैं l गांवों में चिकित्सा की अन्य कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण भोले भाले ग्रामीण मजबूरीवश इन झोलाछापों के पास जाते हैं l इलाज के नाम पर बाटल लगाना और कपडे के ऊपर से ही इंजेक्शन लगा देना जैसे काम इनके उपचार करने का तरीका हैं l
उपचार के चक्कर में कई बार ग्रामीणों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ता है l हाल ही में एक सनसनीखेज मामला झारखंड में चतरा जिले के झटखोरी मेंउजागर हुआ है जहाँ दो झोलाछाप डाक्टरों की करतूत सामने आई है l जानकारी के अनुसार एक महिला का अल्ट्रासाउंड करके झोलाछाप डाक्टर ने बताया कि महिला को बेटी होगी परन्तु बाद में उस महिला को बेटा हुआ l तब दो झोलाछाप डाक्टरों ने मिलकर अपनी गलती को छिपाने के लिए नवजात शिशु का लिंग काट दिया जिससे नवजात शिशु की मौत हो गई l इतना ही नहीं इन वहशियों द्वारा मृत शिशु का शव झाड़ियों में फेंक दिया गया था l
जब परिजनों को इस बात का पता चला तो आक्रोशित परिजनों ने हंगामा किया तो इन्होने परिजनों को १ लाख रूपये का लालच देकर मामला निपटाने का प्रयास किया परन्तु जब बात नहीं बनी तो दोनों झोलाछाप डाक्टर क्लिनिक छोड़कर फरार हो गए l
झारखण्ड राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने सिविल सर्जन को इन दोनों पर एफआईआर दर्ज कराने और मामले की जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। जानकारी के अनुसार दोनों झोलाछाप डाक्टरों पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है l
अब प्रश्न यह उठता है क्या शासन की लचर स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते झोलाछापों द्वारा इस तरह के जघन्य कुकृत्य किये जा रहे हैं ? या स्थानीय स्तर के मेडिकल आफिसरों की मिलीभगत से यह सारा खेल चल रहा है l बहरहाल दिल दहला देने वाला यह कोई पहला मामला नहीं है जब झोलाछाप जैसे अयोग्य खुद को चिकित्सक बताकर बड़े पैमाने पर खुलेआम ग्रामीणों की जान से खिलवाड़ करते देखे जा रहे हैं l अब देखना यह है क्या राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य मिशन चलाकर झोलाछापों को चिन्हित कर जेल में डाला जायेगा या जाँच की आंच में रोटियां सेंकने में माहिर भ्रष्ट-तंत्र के तरफदारों द्वारा लीपापोती करके मामले को दबा दिया जायेगा l