मुंबई - नोटबंदी और जीएसटी के साइड इफेक्ट इतने खतरनाक होंगे किसी ने सोचा भी ना था l नोटबंदी और जीएसटी की जल्दबाजी ने पूरे देश के बैंकों की कमर तोड़ दी है। कई सहकारी बैंक डूब गए हैं। सरकारी और सहकारी बैंकों में कर्ज वितरण पर इसका सबसे बुरा असर पड़ा है l नए कर्ज मिल नहीं रहे हैं और पहले से दिए गए कर्जों की वसूली नहीं हो पा रही है। गौरतलब है कि देशभर के बैंक में जर्बदस्त कैश की कमी है, जिससे लोगों में फिर आक्रोश भड़क रहा है। बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह से वेंटिलेटर पर है। कई बैंकों के बंद होने या डूबने की आशंका है, जिससे खाताधारकों का विस्वास डगमगा गया है l
सहकारी बैंकों की हालत खस्ता -
वर्तमान हालात यह है कि सहकारी बैंक दम तोड़ रहे हैं । अकेले महाराष्ट्र के अंदर देशभर की तुलना में 50 प्रतिशत सहकारी बैंक हैं, जिनकी हालत खस्ता हो चुकी है। नोटबंदी के दौरान आरबीआई की ओर से सहकारी बैंकों को पुराने 500 और 1000 के नोट बदलने की अनुमति नहीं दी गई थी, इस प्रमुख कारण से बैंक दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गए।
करे कोई भरे कोई -
बैंकों की वर्तमान हालात पर करे कोई भरे कोई की कहावत चरितार्थ हो रही है l नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग बैंकों को करोड़ों की चपत लगाकर विदेश भाग गए और उसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है l इन पूंजीपतियों से कर्ज वसूली के लिए कोई कठोर कानून नहीं है इसलिए यह लोग अपनी कारगुजारियां करते रहते हैं l
मर्जिंग का दिया जा रहा है हवाला -
दिवालिया होने की कगार पर पहुंचे बैंक मर्जिंग करने की प्रतीक्षा की बात कह रहे हैं, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। जब इन बैंकों की कमर पहले से टूट चुकी है, कर्ज देने की प्रक्रिया ठप है और कर्ज वसूली के लिए आरबीआई के नियम पूरक नहीं हैं, तो ऐसी स्थिति में कोई मजबूत बैंक इनके साथ मर्जिंग क्यों करेगा? सिटी को-आॅपरेटिव बैंक जैसे बैंक मर्जिंग करने की दुहाई दे रहे हैं, लेकिन इनकी हालत बेहद कमजोर हो चुकी है। सिटी को-आॅपरेटिव बैंक मर्जिंग करने का झूठा आश्वासन दे रहे हैं। जब पहले से ही कई बैंक मर्जिंग की कतार में हैं और उनके ऊपर प्रशासन है, तब भी उन्हें कोई आशा नहीं है, फिर बाकी के बैंकों के आश्वासन का क्या मतलब है?
खाताधारकों का विस्वास डगमगाया -
बैंकों को वर्तमान हालात से खाताधारकों कण विस्वास डगमगा गया है जो कि बैंकिंग सिस्टम के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है l बैंक पर गहरा संकट आने से अब खाताधारकों को अपना पैसा डूबने की आशंका है। आरबीआई ने सिटी को-आॅपरेटिव बैंक को निर्देश दिया है कि बैंक के कस्टमर्स अब अपने खाते से एक हजार रुपए से ज्यादा नहीं निकाल पाएंगे। आरबीआई की तरफ से नोटिस में कहा गया है कि बैंक निगरानी में है। इस निर्देश से खाताधारकों के होश उड़ गए हैं l
अब देखना यह होगा कि इस असमंजस की स्थिति से निपटने के लिए सरकार की और से क्या प्रयास किये जाते है और उनका क्या परिणाम सामने आता है l पर इतना तो तय है कि देश का बैंकिंग सिस्टम असमय और जल्दबाजी में किये गए फैसलों से आज वेंटिलेटर पर है l