भोपाल - सुप्रीम कोर्ट के एक बदलाव ने एक दिन में तनाव का वातावरण निर्मित करके रख दिया है l राजनीती के चलते शांति प्रिय जनमानस का जीना मुहाल हो गया है l इसी बदलाव को लेकर दलित संगठनों द्वारा २ अप्रेल को भारत बंद का आह्वान किया गया l दलित संगठनों द्वारा शांतिपूर्वक प्रदर्शन की बात कही जा रही थी परन्तु आज सुबह से ही देश के कई हिस्सों से तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएँ देखी जा रही है l कहीं पुलिस को बंदी बनाया जा रहा है तो कहीं, पत्रकार इस हिंसा के शिकार हो रहे हैं l क्या सर्वोच्च न्यायालय की बदलाव वाली भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं ? यह अब किस जाँच का विषय होगा ? केवल अधिकारों की एक लड़ाई को लेकर बाकायदा चेतावनी देकर २ अप्रेल बंद का यह प्रदर्शन हिंसक रूप धारण कर चुका है l
मध्यप्रदेश ,उत्तरप्रदेश, बिहार और राजस्थान सहित कई राज्य हिंसा की चपेट में हैं l जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में ४ लोगों की मौत होने की खबर आ रही है l जिसके चलते ग्वालियर और भिंड के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया गया है l हिंसक घटनाओं को बढ़ता देख केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र तोमर ने आनन-फानन में गृह मंत्री राजनाथसिंह से मुलाक़ात की है और अतिरिक्त सुरक्षा बल की मांग की है l
जानकारी के अनुसार पत्थरबाजी और लाठीचार्ज के दौरान अशोकनगर एसडीओपी घायल हो गए है l हिंसा के चलते कवरेज के दौरान मुरैना के बंसल न्यूज़ के पत्रकार सत्येन्द्र तोमर भी घायल हो गए हैं l डबरा में दलित आन्दोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कर्मियों को ही थाने में बंधक बना लिया है और तोड़फोड़ की गई है l
व्यापारी खौफ़ में हैं क्योंकि जबरन दुकाने बंद कराई जा रही हैं l पुलिस और कानून की सुरक्षा के बीच भीडतंत्र अपना काम कर रहा है l विरोध है जो सड़क पर नजर आ रहा है परन्तु इस विरोध के बीच व्यापारी से लेकर आम परेशान है साथ ही सरकारी और निजी सम्पत्ति का नुकसान भी हो रहा है l हर हिंसक विरोध प्रदर्शन अपने पीछे ऐसे दर्दनाक निशाँ छोड़ जाते है जो कई सालों तक मिटाए नहीं मिटते l
बतादें कि आज भारत बंद इसलिए है कि सुप्रीमकोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में बदलाव किया है l इस बदलाव के तहत कोर्ट का कहना है कि इस एक्ट के तहत दर्ज मामले की विवेचना पहले होगी उसके बाद ही किसी की गिरफ़्तारी होगी क्योंकि इस एक्ट का बड़े पैमाने पर दुरूपयोग हो रहा है l इसी बदलाव का दलित संगठन विरोध कर रहे है जिसके चलते देश के कई हिस्सों में हिंसा जारी है l क्या बदलाव करने का तरीका बदला नहीं जा सकता था जिससे देश में फैले तनाव के माहौल को रोका जा सकता l
आखिर किस संवैधानिक अधिकार की प्राप्ति के लिए इस तरह के संगठनों को हिंसक प्रदर्शनों की छूट दी जाती है l इसके लिए कौन जिम्मेदार है ? इस मामले को लेकर इंटेलिजेंस सिस्टम फ़ैल होने की बात कही जा रही है परन्तु इतना तो सभी जानते है कि सिस्टम खुद फ़ैल नहीं होते l सिस्टम को राजनैतिक और न जाने किन किन साजिशों के चलते फ़ैल जाता है l