दानीकुण्डी - मरवाही ब्लॉक पिछले 3 वर्षों से सूखे की मार झेलता आ रहा है। जिसके दुष्प्रभाव का आकलन उसके मेहनत के बदले किसान को मिलने वाले फसल की मात्रा से लगाया जा सकता है। पर लगातार कम वर्षा व दिन ब दिन बढ़ती गर्मी के कारण क्षेत्र में जल संकट गहराता जा रहा है।
सेमरदर्री ग्राम पंचायत के बांधा टोला में स्थित बांध जिस पर इस क्षेत्र के किसान व पशु पानी के लिए आश्रित रहते हैं,जो पूरी तरह से सूखने के कगार पर है। गर्मी की शुरुआत में ही क्षेत्र की यह दशा है। आस पास के जल स्रोत के सूखने के कारण कूंए सूख रहे हैं, तथा हैंडपंप का जल स्तर नीचे चला गया है। कहीं निकासी के लिए अगर जल उपलब्ध भी है, तो पीने का पानी लाने 1 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है। क्षेत्र के कई तालाबों का सही समय पर उचित परिमाण में गहरीकरण न होने के कारण तालाब अब पूरी तरह से सूख गए हैं। अब किसानों को फसल उगाने के लिए नहीं, पहले अपनी जान बचाने को पानी चाहिए। पशुओं के लिए तालाब बांध व अन्य स्रोतों से पानी की आपूर्ति होती है, जिसके इस गर्मी के मध्य तक पूरी तरह से सूख जाने के आसार हैं।
कटरा ग्राम पंचायत के आश्रित गांव ढ़पनीपानी व चिल्हन टोला की स्थिति भी इस मामले में दयनीय है, यहां लोग तीन चार दिन तक बिना नहाए जल संकट से लड़ाई लड़ रहे हैं, यहां लोगों द्वारा कहा जा रहा कि पहले हमें पीने का पानी मिले तब जाकर अन्य कामों में पानी का उपयोग करें। ऐसे में मवेशियों को पानी देना इनके लिए एक चुनौती का विषय है। जंगल के अंदर पानी की अब तक कोई व्यवस्था ना होने के कारण जंगली जानवर रात के समय पानी तलाशते हुए गांव के अंदर तक आ जाते हैं।
इसी तरह मगुरदा ग्राम पंचायत के भुकभुका गांव, जहां 28 घर जल के एक प्राकृतिक स्त्रोत पर निर्भर रहते हैं। गांव वालों का कहना है, जल का यह एक छोटा सा स्त्रोत पूरे वर्ष नहीं सूखता इसमें पानी जमीन के अंदर से हमेशा निकलती रहती है, इस स्त्रोत से ही पशु-पक्षी भी अपनी प्यास बुझाते हैं। इस स्त्रोत को मापने पर यह दो बाई दो तथा इसकी गहराई लगभग 10 इंच पाई गई जिस पर 28 परिवार निर्भर हैं शाम को पशुओं के घर वापसी के दौरान इस छोटे से स्त्रोत में पशुओं का हुजूम जम जाता है।
इनका कहना है-
सेमरदर्री क्षेत्र के जनपद सदस्य अर्जुन सिंह मार्को - काहेतर में जल संकट एक विकट समस्या बनती जा रही है । शुरुआती गर्मी में जल स्त्रोतों की यह दशा बड़े संकट के आगमन का संकेत दे रही है । शासन तक यह बात पहुंचनी जरूरी है, जल्द कोई व्यवस्था करनी होगी।
मगुरदा ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम भुकभुका के ग्रामीण जगमोहन सिंह - यह छोटा सा प्राकृतिक स्त्रोत है, जिसके भरोसे गांव की जलपूर्ति होती है। स्कूल में एक हैंडपंप है, जिस पर अन्य टोलों के लोग निर्भर रहते हैं।
कटरा ग्राम पंचायत के आश्रित गांव में ढ़पनी निवासी बुधराम सिंह - पानी की बड़ी समस्या होती है, एक ही है, इस पूरे गांव में जिसमें से पानी भी कम निकलती है। गर्मी में यह भी सूख जाएगी निकासी के लिए 1 किलोमीटर दूर बांध में जाते हैं।
कटरा सरपंच प्रतिनिधि दयाराम पाव - हमारे गांव के तीन चार टोलों में पानी की भारी समस्या है, इस ओर शासन प्रशासन को ध्यान देना होगा ताकि इस बड़ी समस्या से निजात पाया जा सके।
चिल्हन टोला निवासी व पूर्व पंच झाकन सिंह नेताम - गांव पानी की किल्लत से जूझ रहा। लोग यहां तीन-चार दिन से नहीं नहाते पशुओं को पानी पिलाने अन्य गांव की ओर ले जाते हैं विभिन्न प्रस्तावों के बाद भी कोई व्यवस्था नहीं की गई।