होशंगाबाद -   राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के तत्वधान में आगामी 22 अप्रैल को जिला एवं सत्र न्यायालय एवं सभी तहसीलों में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। नेशनल लोक अदालत में विद्युत अधिनियम के प्रकरणों में 2 स्तर पर छूट दी जाएगी। प्रीलिटिगेशन स्तर पर एवं लिटिगेशन स्तर पर छूट दी जाएगी।

               प्रीलिटिगेशन स्तर पर विद्युत के ऐसे मामले जो अभी न्यायालय में दर्ज नहीं हुए हैं उस मामले में आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 40 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किए जाने पर निर्धारित आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात प्रत्येक छमाही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर शतप्रतिशत की छूट दी जाएगी। वहीं लिटिगेशन स्तर पर कम्पनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 25 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान के चूक किए जाने पर निर्धारित आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात प्रत्येक छमाही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर शतप्रतिशत छूट दी जाएगी।

              विद्युत विभाग ने लोक अदालत के दिन राजीनामा करने पर छूट देने की घोषणा की है। विद्युत विभाग ने बताया कि आवेदक को निर्धारित छूट के उपरांत शेष देय आंकलित सिविल दायित्व एवं ब्याज की राशि का एक मुश्त भुगतान करना होगा। उपभोक्ता या उपयोगकर्ता का विचाराधीन प्रकरण वाले परिसर एवं अन्य परिसर पर उनके नाम पर किसी अन्य संयोजन के विरूद्ध विद्युत देयकों के बकाया राशि का पूर्ण भुगतान भी करना होगा।

             आवेदक के नाम पर कोई विधिक संयोजन ना होने की स्थिति में छूट का लाभ प्राप्त करने हेतु आवेदक द्वारा विधिक संयोजन प्राप्त करना एवं पूर्व में विच्छेदित संयोजनों के विरूद्ध बकाया राशि का पूर्ण भुगतान किया जाना होगा। वार्षिक नेशनल लोक अदालत में छूट आवेदक द्वारा विद्युत चोरी, अनाधिकृत उपयोग पहली बार किए जाने की स्थिति में ही दी जाएगी। विद्युत चोरी या अनाधिकृत उपयोग के प्रकरण में जिन उपभोक्ताओं ने पूर्व में लोक अदालत में छूट प्राप्त की है उन्हें दुबारा छूट प्रदान नहीं की जाएगी। सामान्य विद्युत देयकों के विरूद्ध बकाया राशि पर कोई छूट नहीं दी जाएगी और अन्य छूट मात्र नेशनल लोक अदालत में समझोता करने के लिए ही लागू रहेगी।