केवलारी - आजकल सबसे ज्यादा परेशान लोग गरीबी रेखा में नाम जुड़वाने के लिए हो रहे हैं, इसकी सबसे बड़ी वजह है के लोगों के नाम गरीबी रेखा की लिस्ट से बगैर किसी सर्वे के काट दिए गए हैं और गरीब लोग ऑफिसों के चक्कर लगा रहे हैं l फोटो कॉपी की दुकानों और लोकसेवा, तहसीलदार, जनपद पंचायत जैसे कार्यालयों में अपना समय लगा रहे हैं l
लेकिन उनको कहीं भी अपनी समस्या का निदान नहीं मिल रहा है l आरटीआई एक्टिविस्ट एवं आम आदमी पार्टी किसान संगठन के प्रदेश सचिव धनीराम गुप्ता ने इस संबंध में आरटीआई के तहत तहसीलदार कार्यालय से जानकारी मांगी है l आरटीआई के माध्यम से ग्राम पंचायत केवलारी कला खटोला सेमरा टडा एवं नारायणपुर पंचायत की गरीबी रेखा से काटे गए नामों के संदर्भ में जानकारी मांगी तो बड़े चौंकाने वाले तथ्य सामने आए |
इन तथ्यों के आधार पर स्पष्ट हुआ कि किसी भी गांव में शासकीय अधिकारी के द्वारा कोई सर्वे नहीं किया गया l किसी भी व्यक्ति से उसकी आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी नहीं ली गई | धनीराम गुप्ता स्वयं पांचों पंचायतों में गए वहां के सरपंच और गरीबी रेखा में काटे गए नामों वाले व्यक्तियों से मिले तो यह जानकारी सामने आई कि जितने भी नाम गरीबी रेखा की सूची से काटे गए हैं वह तथ्यहीन हैं |तत्कालीन तहसीलदार सीजी गोस्वामी ने स्वयं यह कुबूल किया कि सर्वे किसी व्यक्ति से पूछकर नहीं किया गया है | फिर भी पात्र व्यक्तियों को गरीबी रेखा से हटा दिया गया l
जब इस संबंध में धनीराम गुप्ता फूड इंस्पेक्टर कुर्रे साब से मिले तो उन्होंने बताया कि जिन लोगों के गरीबी रेखा से नाम काटे गए हैं उनके नाम 1 साल तक किसी भी स्थिति में नहीं जुड़ पाएंगे इसका अर्थ यह हुआ कि बेचारे गरीबों का हक 1 वर्ष तक छीना जाएगा l यह प्रशासन की घोर लापरवाही है, कि बगैर किसी सर्वे के पात्र व्यक्तियों के नाम काट दिए जाएं यह प्रजातंत्र में जनता के साथ अन्याय है l