उमरिया /मानपुर -  मानपुर स्थित सैकड़ों वर्ष पुरातन ऐतिहासिक देवी धाम मढ़िया एवं देवी मंदिर में आज बासंतेय नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के सप्तम रूप कालरात्रि की पूजा अर्चना करने भक्तों की भीड़ भारी संख्या में नजर आई। स्थानीय मढ़िया धाम पहुंचे माता के भक्तों में अलसुबह चार बजे से ही मां का दूध,जल और पंचामृत से अभिषेक करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा l जिसमें विशेष रूप से नगर की मातृशक्तियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया वहीं पुरुष वर्ग भी माता जगदम्बा के दरबार में मत्था टेकने पहुंचे।

           ज्ञात हो कि नवरात्र के प्रथम दिवस से ही श्रृद्धालुओं और मां के भक्त प्रतिदिन सुबह उठकर नहा-धोकर पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ मातारानी के दरबार में पहुंच कर वहां विधि विधान से पूजन कर देवी माता को प्रसन्न कर अपना और अपने कुटुम्ब के कल्याण की मंगल कामना करते हैं और यह सिलसिला क्रमबद्ध रूप से नवमी तिथि तक चलता रहता है l

          इस दौरान भक्तों द्वारा प्रत्येक नौ दिन तक मां जगदम्बा के नौ स्वरुपों का निर्धारित विधि से पूजन अर्चन किया जाता है l साथ ही नवरात्र के पांचवे दिन मां को पंचामृत अर्पण कर नौ दिवसीय उपवास रहकर अनुष्ठान करने वाले भक्त कन्या भोज का आयोजन कर मां की अनुकम्पा प्राप्त करते हैं और अष्टमी तिथि को मढ़िया धाम में भी नगर के श्रृद्धालुओं के सहयोग से सामूहिक कन्या भोज और विशाल भण्डारे का आयोजन परम्परागत रूप से किया जाता है l जिसमें समस्त जन पहुंच कर मां जगत जननी का प्रसाद ग्रहण कर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

        मानपुर पुरानी बाजार में स्थित काली मंदिर के साथ साथ क्षेत्रीय ग्रामों में मौजूद और मान्य खेरमाई के साथ मानपुर के समीपस्थ ऐतिहासिक बांधवगढ़ के किले की शेषशय्या से अवतरित पुण्य सलिला चरण गंगा के पावन तट पर स्थित कल्चुरी कालीन ज्वालामुखी धाम में तथा डोंगरी घाटी मसीरा के पावन शारदा देवी धाम में भी मां के पूजन अर्चन का यही क्रम नौ दिनों तक चलता है और मानपुर नगर के साथ साथ पूरा क्षेत्र ही मां दुर्गा की भक्ति में लीन हो कर आराधना करता है। इस भक्तिपूर्ण माहौल में मां जगत जननी से हमारी भी यही अरज और कामना है कि-सर्वे भवन्तु सुखिन सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यंतु मां कश्चिद दुःख भाग्भवेतु।।जय माता दी। गौरतलब हो कि इस अवसर पर माता के समस्त मंदिरों की साफ-सफाई और साज सज्जा मनोहारी होती है और यह सब देखकर मन असीम आनन्द में आकण्ठ डूबकर सिर्फ मां जगत जननी सर्व कल्याणिनी की भक्ति में डूबने को बेबस होकर असीम आनन्द को प्राप्त करता है।