होशंगाबाद - जैंसा कि आपको बतादें कि भ्रष्टाचार के इस मामले में आर टी आई से प्राप्त दस्तावेज स्वास्थ्य विभाग को प्रस्तुत करने के बाद भी फिलहाल मामला डोलरिया पुलिस के पाले में है लेकिन विगत 3 सालों में भ्रष्टाचार की इस जाँच में कई थाना प्रभारी और कई मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के तबादले हो चुके हैं और जाँच अभी भी बदस्तूर जारी है l
गौरतलब है कि मामला वर्ष २०११ से २०१४ के बीच मोबिलिटी सपोर्ट योजना में लाखों के भ्रष्टाचार का है, जिसे लेकर तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ ए.एल. मरावी के निर्देशन में डोलरिया पुलिस थाने में अपराध क्रमांक १००/१५ दर्ज है l लेकिन २०१५ से लेकर आज दिनांक तक फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाले स्वास्थ्य घोटाले के आरोपियों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया गया है l ऐंसे में पुलिस की कार्य प्रणाली पर कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं l पुलिस जाँच में यदि मोबिलिटी सपोर्ट योजना के अंतर्गत इस्तेमाल किये गए वाहनों की ट्रेवल एजेंसियों से जानकारी जुटाई जाती तो मामला साफ़ हो जाता l लेकिन मिलीभगत के चलते डोलरिया थाने के 3 थाना प्रभारी स्थानांतरित हो चुके हैं l और मामला अब जाकर अनुविभागीय पुलिस अधिकारी सिवनी मालवा के संज्ञान में आया है l जिसे लेकर डोलरिया थाने से प्राप्त जानकारी के मुताबिक भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा ४०९ 13 (१) डी (४) 13 (२) की धाराओं में बढ़ोत्तरी की गई है l हालाँकि अभी भी मामले में आरोपियों की गिरफ़्तारी नहीं हो सकी है और फिलहाल मामला एसडीओपी के द्वारा कार्यवाही के इंतज़ार में है l
गरीबों के स्वास्थ्य पर डाका डालने वाले तक़रीबन 3 बीएमओ अभी तक पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं l ऐसे में पुलिस जाँच पर प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं l लेकिन न तो फर्जी ट्रेवल एजेंसियों की जाँच पड़ताल हुई और न ही विभागीय जाँच को आधार मानते हुए भ्रष्टाचार में लिप्त बीएमओ को कटघरे में खड़ा किया गया है l बल्कि स्वास्थ्य विभाग को घोटाले की जानकारी लगते ही विभाग के आला अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचारियों को तबादला करके अन्य ब्लाक में भेज दिया गया था l फिलहाल भ्रष्ट बीएमओ डॉ आर.के.चौधरी पचमढ़ी में पदस्थ हैं l और संविदा लेखापाल हेमलता प्रधान पर गाज गिरी है जिसके चलते जिला कलेक्टर के आदेशानुसार लेखापाल को बर्खास्त किया गया है l जाहिर है यदि समय रहते भ्रष्टाचारियों को सलाखों के पीछे भेज दिया जाता तो गरीबों के स्वास्थ्य पर डाका डालने वालों को निश्चित रूप से सबक मिलता l परन्तु मिलीभगत के चलते भ्रष्टाचार को अंजाम देने वाले धनकुबेरों को पुलिस अब तक गिरफ्त में नहीं ले पाई है l
इनका कहना है -
डोलरिया थाना प्राभारी -
हमारे द्वारा मामले को एसडीओपी साहब के पास भेजा गया है और एसडीओपी साहब ने भ्रष्टाचार अधिनियम की कार्यवाही करते हुए धारा ४०९ 13 (१) डी (४) 13 (२) बढाकर जाँच करने की जानकारी है l इस सम्बन्ध में एसडीओपी साहब ही बताएँगे l
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी
डॉ प्रमोद चतुर्वेदी
हालाँकि मामले की जानकारी मुझे पूरी तरह से नहीं है मैं अभी-अभी आया हूँ,, लेकिन दस्तावेज देखकर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी l