दानीकुण्डी - मरवाही ब्लॉक के ग्राम पंचायत सेमरदर्री के अंतर्गत आने वाले बगैहा टोला में विशेष समुदाय के पंडो आदिवासी व गोंड़ जनजाति के लोग रहते हैं, जो सेमरदर्री के टापूनुमा बगैहा टोला में कई पीढ़ियों से रहते आ रहे हैं, जो तीन ओर से नदियों से घिरा हुआ है,जहां ये लोग मूल सुविधाओं से दूर जंगल व इन नदियों पर ही आश्रित रहते हैं। ये क्षेत्र पहाड़ी है, जिस पर बोर करने के बाद भी पानी निकलना लगभग असंभव होता है।
वन विभाग के द्वारा बगैह टोला के इस जंगल में विगत 5 दिन पूर्व से चारों ओर फैंसिंग कर जंगल को घेरने का काम किया जा रहा है। जिसे यहां रहने वाले लोगों का संपर्क जंगल व जंगल की दूसरी ओर नदी से संपर्क टूट जाएगा, यहां इस आदिवासी समुदाय के लोगों की मूल समस्या पानी है और पानी के लिए यहां के लोग मुख्यता है नदी पर आश्रित है l
यहां लोगों की दूसरी समस्या यह है, कि राशन दुकान में प्रति व्यक्ति 7 किलो चावल मिलता है, जो एक माह के लिए पर्याप्त नहीं होता, जिस कारण इस समुदाय को जंगल में मिलने वाले कांदा, कूसा,तेंदू, अचार जैसे जंगली खाद्य पदार्थों पर स्वयं को आश्रित रखना पड़ता है, पर इन के अनुसार जंगल को पूरी तरह से फेंसिंग तार से घेर पर जंगल से इनका संपर्क टूटेगा,यहां लोग खाना पकाने के लिए गैस का उपयोग नहीं करते, पूछने पर कहते हैं सरकार फ्री में गैस की सामग्री तो दे रही है, पर गैस खत्म होने के बाद गैस भरने के लिए पैसे भी तो होने चाहिए l जिस कारण लोग जंगल में से लकड़ी एकत्र कर उसका उपयोग चूल्हा जलाने में करते हैं, पर इन जंगल को ऐसे घेर देने पर यह व्यवस्था भी खत्म हो जाएगी।
गांव में कहीं भी चारागाह घोषित नहीं है, जिस कारण पशु ,मवेशियों को जंगल में चराना पड़ता है,ये जानवर नदी जाकर पानी पीते हैं, ऐसे में इस जंगल के ऐसे घिराव से जानवर ना जंगलो में जा पाएंगे, ना ही नदी तक पहुंच पाएंगे। पंडो आदिवासी कहते हैं, यह जल, जंगल, जमीन हमारा है,इस पर हमें पूरा अधिकार चाहिए,हम कई पीढ़ियों से यहां निवासरत हैं, यह जंगल ही हमारा घर है,कई बार आवेदन करने के बाद भी वन भू अधिकार पट्टा नहीं मिला है, अगर मिला भी है तो कुछ लोगों को जो कई एकड़ पर कई वर्षों से निवासरत है, जिस पर वह खेती भी करते हैं, का आकलन किए बिना ही एक डेसीमल से पंद्रह डेसीमल तक का ही वन भू अधिकार पट्टा दिया गया है। इन आदिवासियों का कहना है हमें हमारा अधिकार चाहिए, नहीं तो हम शाशन प्रशासन के समक्ष सामूहिक आत्मदाह करेंगे।
इनका कहना है -
बगैहाटोला के निवासी मंगल सिंह सरौता गोंड़ - हम कई पीढ़ियों से यहां रह रहें हैं, पर हमारा वन भू अधिकार पट्टा कई आवेदनों के बाद भी नहीं मिला है।
बगैहा टोला के सोनसाय पंडो - इस तरह जंगल के बीच फेंसिंग तार घेरने के बाद ना हम जंगल तक जा पाएंगे ना ही नदी तक हम पूरी तरह से मूल सुविधाओं से दूर हो जाएंगे।
बगैहटोला के मंगल सिंह पांडू - मेरे पास दो एकड़ की जमीन है,जिसका उपयोग मेरे पुरखों के समय से रहने व खेती किसानी के लिए किया जा रहा, मुझे पिछले वर्ष ही केवल एक डेसीमल जमीन का पट्टा दिया गया।
बगैहटोला के विशाल सिंह सरौता गोंड़ - इस जंगल को हम मां के समान समझते हैं,हम यहां पेड़ों की रक्षा करते हैं,किसी प्रकार की क्षति पेड़ो व जंगली जानवरों को नही पहुंचाते फिर क्यों जंगल को ऐसे घेरा जा रहा है।
सेमरदर्री सरपंच प्रताप सिंह भानु - इस समुदाय का कहना है, शासन पहले सभी मूल सुविधाओं से हमको लाभांवित करें उसके बाद वह जो फैसला लेगी हम मानेंगे साथ ही यह भी कहते हैं,कि ऐसे जबरन किए फैसले पर अमल होने से सामूहिक आत्मदाह करने की बात कहते हैं।
मरवाही डिप्टी रेंजर संजय त्रिपाठी - हम 2005 के पहले से निवासरत लोगों को उनका वन भू अधिकार पट्टा देंगे, साथ ही फेंसिंग के बीच जहां जरूरत हो गेट खोल देंगे।