होशंगाबाद -   नर्मदा नदी एवं तवा नदी के संगम स्थल बान्द्राभान में 16 मार्च से आयोजित दो दिवसीय पंचम नदी महोत्सव का आज समापन हुआ। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर पधारे केन्द्रीय मंत्री ग्रामीण विकास, पंचायती राज एवं खनिज नरेन्द्र सिंह तोमर ने उपस्थित लोगो के बीच स्वर्गीय अनिल माधव दवे का स्मरण करते हुए कहा कि मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं जिन्होने नदी महोत्सव की शुरूआत की।

                तोमर ने कहा कि प्रकृति का नियम है कि रिक्तता समय रहते भर जाती है किन्तु श्री दवे का व्यक्तित्व एवं कृतित्व ऐसा था कि उनकी भरपाई संभव नही है।  दवे एक कार्यकर्ता, चिंतक, नेता एवं स्वयंसेवक के रूप में आदर्श थे। तोमर ने कहा कि मां नर्मदा की महिमा अपार है। भारतीय संस्कृति में प्रकृति के हर पहलु को सम्मान से जोडने की कोशिश की गई है। हमारी संस्कृति में नदियों, पर्वतों, वृक्षों, जंगल, जमीन, जल की पूजा की जाती है। यह हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है।

               उन्होने कहा कि नदी तो नदी है हमें हर नदी को गंगा एवं नर्मदा के रूप में देखना चाहिए। प्रकृति के द्वारा जो कुछ भी जीवात्मा को प्रदान किया गया है उसकी भी प्रकृति ने एक आचार सहिता बना रखी है। प्रकृति का दोहन करने की स्वतंत्रता तो प्रकृति ने हमें दी है किन्तु यदि हम प्रकृति का शोषण करेगे तो प्रकृति हमें इसका जवाब देगी। प्रकृति के संरक्षण की व्यवस्था मनुष्य को जन्म से ही दे दी जाती है। नदी महोत्सव जैसे आयोजन होते है जहां हम नदी संरक्षण के लिए चिंतन व विचार करते है। तोमर ने कहा कि मैं चाहता हूं कि ऐसी योजना तैयार की जाए कि जो लोग नदी संरक्षण मे बाधक है व वृक्षो का दोहन करते है उन सब को सामाजिक चेतना का ज्ञान कराया जाए।

              उन्होने कहा कि नदी का दोहन नीति के अनुरूप हो तो नदी का स्वरूप बिगडेगा नहीं। उन्होने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि मां के वक्ष स्थल को काटा जाए तो बच्चे का जन्म नहीं होगा। वैसे ही यदि नदी से रेत निकाली जाए तो नदी सुरक्षित नहीं रहेगी और नदी समाप्त हो जाएगी। नदी समाप्त हो जाएगी तो हम सबका जीवन भी समाप्त हो जाएगा।