बैतूल - मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के प्रभारी एवं प्रदेश के नर्मदा घाटी विकास (स्वतंत्र प्रभार), सामान्य प्रशासन, विमानन, आनंद एवं आदिम जाति कल्याण, अनुसूचित कल्याण मंत्री लालसिंह आर्य ने कहा कि जनजातीय समाज हमें प्रकृति से जोड़ता है एवं हमारी प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित करता है। यह समाज अपनी लगन एवं विश्वास से कला को जीता है। आदिवासी समाज हमारी संस्कृति की पहचान है। जनजातीय आदिवासी संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए जनजातीय कार्य विभाग सतत् कार्य कर रहा है।
श्री आर्य शनिवार को बैतूल में आदिम जाति अनुसंधान विकास संस्था भोपाल एवं वन्या जनजातीय कार्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जनजातीय नृत्य-संगीत एवं शिल्प कलाओं पर केन्द्रित तीन दिवसीय उत्सव आदिरंग-2018 के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सांसद श्रीमती ज्योति धुर्वे, विधायक बैतूल हेमन्त खण्डेलवाल, विधायक घोड़ाडोंगरी मंगलसिंह धुर्वे, जिला पंचायत अध्यक्ष सूरजलाल जावलकर, जिला योजना समिति सदस्य जितेन्द्र कपूर सहित कलेक्टर शशांक मिश्र, पुलिस अधीक्षक डीआर तेनीवार, सीईओ जिला पंचायत सुश्री शीला दाहिमा एवं बड़ी संख्या में नागरिक गण मौजूद थे।
प्रभारी मंत्री ने इस उत्सव का विधिवत् शुभारंभ करते हुए कहा कि आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्था जनजातीय भाषा, पहनावा, उनके रहन-सहन पर अनेक अनुसंधान करती है एवं कई किताबें भी प्रकाशित की है। जनजातीय संस्कृति को संजोए रखने के लिए प्रदेश का जनजातीय कल्याण विभाग निरंतर कार्य कर रहा है। बैतूल में आयोजित आदिरंग कार्यक्रम जनजातीय संस्कृति को आमजन तक पहुंचाने का एक अभिनव प्रयास है। यहां डिण्डोरी, मंडला, धार, झाबुआ एवं अन्य जिलों से आए जनजातीय कलाकार जब अपने कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं तो हमारा रोम-रोम पुलकित हो उठता है।
उन्होंने आमजन से अनुरोध किया कि वे इस कार्यक्रम में अवश्य आएं एवं कलाकारों को प्रोत्साहित करें। इस अवसर पर सांसद श्रीमती ज्योति धुर्वे ने कहा कि यह आयोजित बैतूल के लिए गौरव का विषय है, जो कि जनजातीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में सार्थक सिद्ध होगा। कार्यक्रम के आरंभ में जनजातीय विभाग के प्रमुख सचिव श्री एसएन मिश्रा ने स्वागत भाषण एवं कार्यक्रम के संबंध में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रभारी मंत्री श्री आर्य एवं अन्य अतिथियों द्वारा जनजातीय प्रदर्शनी आदिबिम्ब एवं जनजातीय संस्कृति पर आधारित फिल्म प्रदर्शन आदि दर्पण का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर बैगा जनजाति की पारंपरिक चित्रकला पर आधारित लक्ष्मीनारायण पयोधि द्वारा तैयार की गई पुस्तक ठंगना का भी अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बैतूल के ठाठिया लोकनृत्य से की गई। इसके पश्चात् अनूपपुर के शिवप्रसाद धुर्वे ग्रुप द्वारा प्रस्तुत गुदुम नृत्य को दर्शकों द्वारा काफी सराहा गया। कार्यक्रम में भिलाल सहित गोदना संस्कृति पर आधारित लोकनृत्य की प्रस्तुतियां भी दर्शकों की पसंद रही।
जनजातीय संस्कृति की झलक देखेेंगे जिलेवासी -
इस दौरान जनजातीय विभाग के प्रमुख सचिव एसएन मिश्रा ने बताया कि 17 से 19 मार्च तक स्थानीय लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय जनजातीय उत्सव आदिरंग-2018 में जिलेवासी जनजातीय संस्कृति की झलक देखेंगे। कार्यक्रम स्थल पर अपरान्ह 2 बजे से शिल्पकला मेला, जनजातीय व्यंजन, आदिबिम्ब-जनजातीय छायाचित्र प्रदर्शनी, आदि दर्पण-विभिन्न जनजातियों की जीवन शैली, संस्कृति एवं कलाओं पर केन्द्रित वृत्तचित्रों का प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं सायं 7 बजे से जनजातीय नृत्य-संगीत कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें गोंड (ढुलिया, ठाठिया), कोरकू, बैगा, भारिया, सहरिया, भील, भिलाला आदि जनजातियों के पारम्परिक नृत्य-संगीत एवं अन्य शिल्प कलाओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही जनजातीय छायाचित्रों की प्रदर्शनी आदिरंग जनजातीय शिल्प एवं पारंपरिक भोज्य पदार्थों के स्टॉल भी लगाए गए हैं। कार्यक्रम का संचालन डीडी उइके द्वारा किया गया। अंत में विभाग के संयुक्त संचालक नीतिराज सिंह द्वारा आभार व्यक्त किया गया।