रेहटी  -  १७ मार्च को नवरात्र के एक दिन पहले अमावस्या पर लाखों की संख्या मे प्रसिद्ध तीर्थ स्थल आंवलीघाट में लोग जमा होंगे। और मां विजयासन धाम सलकनपुर में भी शनिवार को भारी भीड़ होने की संभावन है। क्योंकि सलकनपुर और आंवलीघाट की दूरी मात्र १० किमी है।

         जो मां नर्मदा में अमावस्या पर स्नन करने आते हैं वह सभी श्रद्धालु सलकनपुर माता के दर्शन के लिए जरूर पहुंचते हैं। पूरे चैत्र नवरात्र में नवरात्र के एक दिन पहले ही भारी भीड़ जमा होगी। इसके पहले पंचकोशी यात्रा में भी भारी भीड़ आंवलहीघाट और सलकनपुर में जमा है। गुरूवार को भी पंचकोशी यात्रा करने वाले लोग बड़ी तादाद में पहुंचे थे।

        नर्मदा घाटो पर स्नान, दान, पूजा, अर्चना करने के इस ५ दिवसीय त्यौहार को पंचकोशी यात्रा कहा जाता है।  ५ प्रदेशो के हजारो श्रद्धालु मां नर्मदा की पंचकोशी यात्रा इन दिनों कर रहे हैं। यात्रा को तीन दिन बीत गए है। मां विजयासन धाम सलनकपुर और अमलेश्वर धाम आंवलीघाट में हजारो श्रद्धालु सैकड़ो वाहनों से पंचकोशी परिक्रमा की यात्रा पर है। अपनी यात्रा में स्नान दान पूजन अर्चना करने के बाद यह यात्रा मां नर्मदा के प्रसिद्ध पांच नर्मदा घाटो पर जाती है जिनमें भगवान शिव के मंदिर भी शामिल है।

       धारा जी से प्रारंंभ होने वाली यात्रा अमलेश्वर धाम आंवलीघाट, महेश्वर, नेमावर, होशंगावाद, जबलपुर घाटो पर दर्शन और मां नर्मदा की पूजा अर्चना के साथ होती है। इस यात्रा में श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी करने और मां नर्मदा की परिक्रमा करने के उद्देश्य से यात्रा करते हैं। इस यात्रा में वे श्रद्धालु शामिल होते हैं जो श्रद्धालु मां नर्मदा की ३ साल ३ माह, १३ दिन की पैदल परिक्रमा नही कर पाते और ना ही वाहन से परिक्रमा कर पाते हैं। ऐसे श्रद्धालु इन ५ घाटो की वाहनो से परिक्रमा कर पंचकोशी यात्रा करके परिक्रमा का पुण्य लाभ कमा लेते हैं।

      इस पंचकोशी यात्रा में सबसे अधिक श्रद्धालु अमलेश्वर धाम आंवलीघाट में ३ दिनों तक एकत्रित होते हैं जो नवरात्र के प्रथम दिन तक पहुंचते हैं। प्रतिदिन १० से १५ हजार श्रद्धालु अमलेश्वर धाम आंवलीघाट सैकड़ो बस और स्वयं के वाहनो से पहुंच रहे हैं। एक वर्ष में एक बार होने वाली इस परिक्रमा यात्रा का बड़ा ही महत्व बताया जाता है। इसलिए लाखो श्रद्धालु प्रतिवर्ष पंचकोशी परिक्रमा करते हैं।