होशंगाबाद/पिपरिया - अंतर्राष्ट्रीय नदी महोत्सव में सभी पधारे हुए आगन्तुको का जय माता दी समिति स्वागत करेगी ओर सभी अतिथि विद्वानों से समिति का निवेदन रहेगा कि उत्सव मनाने से पहले नदी बचाने पर ध्यान दें l पिछले साल मार्च अप्रेल में मध्यप्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा में एक प्राकृतिक विपदा जलीय वनस्पति के रूप में आई जब पूरे मध्यप्रदेश शासन हलाकान हो रहा था ।
समिति का कहना है कि समिति के उत्साही नॉजवानों ने उस दौरान कलेक्टर साहब की मदद से उस पूरी एजोला को एक डैड लॉक बनाकर जो एक फ़िल्टर डेम की तरह था वहां पूरी एजोला निकालकर उसे सुखाकर जलाकर पूरी तरह नष्ट करते हुए सांडिया से लेकर खम्बात की खाड़ी तक जीवन दायिनी नर्मदा को प्राकृतिक प्रदूषण से मुक्त किया था ।
इसके साथ ही पूरे मध्यप्रदेश में समाज सेवियों एवं सरकारी मशीनरी ने मिलकर करोड़ो पेड़ लगाए जिनमे मूलतः सर्वाधिक मात्रा में नर्मदा के किनारे पेड़ लगाए गए लेकिन कितने लग पाए उसका कोई रिकॉर्ड है क्या उसके बारे में जानकारी लेना चाहिए या नही कि आखिर किसकी जबाबदारी में ये सारा काम हुआ और उसने अपनी जिम्मेदारी को कितना निभाया इसकी भी समीक्षा पंचम नदी महोत्सव में हो तो बेहतर होगा