होशंगाबाद -   नर्मदापुरम् संभाग कमिश्नर श्री उमाकांत उमराव ने आज दधीची अभियान के अंतर्गत अंगदान प्रत्यारोपण की संभागीय समीक्षा बैठक ली। उन्होंने गत 3 से 4 माह से हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। कमिश्नर ने कहा कि संभाग में जितनी भी हाईरिस्क महिलाएं थीं उन महिलाओं तक स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम पहुंची और महिला के साथ साथ परिवार की काउंसिलिंग कर उन्हें उचित पोषण आहार, उचित खान-पान की सलाह दी गई और दवाईयां भी वितरित की गर्इं।

                श्री उमराव ने कहा कि वे गर्व से कह सकते है कि संभाग में जब से हिरण्य गर्भा अभियान शुरू हुआ है तब से लेकर अब तक कोई भी हाईरिस्क महिला की प्रसव के दौरान मृत्यु नहीं हुई है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि अब उनका लक्ष्य और भी बढा हो चला है। वे अब प्रयास करें कि हाईरिस्क महिला का बच्चा कमजोर पैदा ना हो। इसके लिए हर संभव उपाय किए जाएं। हाईरिस्क महिला के परिवार के सदस्यों को महिला एवं बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में लगातार अवगत कराया जाए ताकि वे अपनी सामाजिक एवं पारिवारिक जिम्मेदारी समझें।

               कमिश्नर ने दधीची अभियान के अंतर्गत अंगदान के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 5 मिनट की एनीमेशन फिल्म बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एनीमेशन फिल्म के प्रसार से लोगों में अंगदान करने के प्रति जागरूकता आएगी। कमिश्नर ने जिले के सभी अस्पतालों में अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए अंगदान से संबंधित परामर्श केन्द्र खोलने के निर्देश दिए और कहा कि इन परामर्श केन्द्रों में अंगदान करने वाले एवं जिन्हें अंगदान चाहिए उनकी सूची रहनी चाहिए। बताया गया कि दधीची अभियान में गंभीर नेत्ररोग से पीड़ित बच्चों का सर्वे किया गया है जिन्हें एक आँख या दोनों आँखों से दिखाई नहीं देता है। ऐसे बच्चों के मामले में होशंगाबाद में 100, हरदा में 45 एवं बैतूल में 96 बच्चे हैं जिन्हें तत्काल कॉर्निया की आवश्यकता है।

              कमिश्नर ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे आंगनबाडी केन्द्रवार यह विशलेषण कर लें कि सर्वे में कोई छूटा तो नहीं हैं और यदि कोई सर्वे में छूटा है तो उसे पुन: सर्वे कर सूची से उसका नाम जोड़ा जाए। कमिश्नर ने महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अब 6 वर्ष से ऊपर की आयु के बच्चों का सर्वे करें जिन्हें कॉर्निया या किसी भी प्रकार के अंगदान की आवश्यकता है। बताया गया कि नेत्ररोग के चिन्हांकन हेतु आशा कार्यकर्ता एवं आंगनबाडी कार्यकर्ता को प्रशिक्षण दिया जा चुका है तथा अंगदान की समिति सभी जिलों में बना ली गई है।

अंगदान का बनाया गया प्रोटोकॉल:-

             कमिश्नर श्री उमराव के मार्गदर्शन में अंगदान प्रत्यारोपण का संभागीय प्रोटोकॉल बनाया गया है। कमिश्नर ने बताया कि प्रोटोकॉल के तहत यह निश्चित किया जाएगा कि जिले में कहीं भी कोई सड़क दुर्घटना में या संभावित मौत होती है तो पुलिस अधिकारी एवं आरटीओ अधिकारी दधीची अभियान के वाट्सएप ग्रुप में इसकी जानकारी डालेंगे। संबंधित डॉक्टर भी इसकी जानकारी देंगे कि मृतक को कोई गंभीर बीमारी तो नहीं थी। सभी संबंधित अधिकारी मृतक के परिजनों से संपर्क कर उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही जिन्हें अंगदान की आवश्यकता है उनसे भी संपर्क किया जाएगा।

सभी को वाट्सएप ग्रुप से जोड़ने के निर्देश:- 

            कमिश्नर ने दधीची अभियान के लिए बनाए गए वाट्सएप ग्रुप से सभी थाने, स्वयं सेवी संस्थाओं, जिला परिवहन अधिकारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को जोड़ने के निर्देश दिए हैं। बताया गया कि बैतूल में इस संबंध में पुलिस अधिकारियों का प्रशिक्षण भी किया जा चुका है।

किसी भी बच्चे की जिंदगी कमजोर ना रहे:-

           कमिश्नर ने कहा कि सभी संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि अंगदान के अभाव में किसी भी बच्चे की जिंदगी कमजोर ना रहे। अंगदान प्रत्यारोपण में बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि कोई डोनर मिलता है तो उसके अंग बच्चों के काम आएं ऐसा प्रयास किया जाएगा। बताया गया कि अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए बेनर एवं फ्लैक्स भी लगाए गए हैं और दधीची अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

6 वर्ष के बच्चों का सर्वे करने के निर्देश्:-

          कमिश्नर ने महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि दधीची अभियान के अगले चरण में संभाग के उन सभी 6 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों का सर्वे किया जाए जिन्हें ऑर्गन डोनेशन की आवश्यकता है इसमें स्वयं सेवी संगठनों को भी जोड़ा जाए। कमिश्नर ने बताया कि गंभीर कंडीशन वाले बच्चों को चिन्हित किया जाएगा और बच्चे के माता-पिता की सहमति से बच्चे की अंगदान की आवश्यकता के लिए अपील कराई जाएगी। कमिश्नर ने कहा कि गंभीर बीमारी से अंतिम चरण भी पहुंच चुके व्यक्ति एवं जिसे अंग चाहिए दोनों को एक मंच पर लाने की रणनीति तैयार की जाएगी।

         दधीची अभियान की बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी होशंगाबाद डॉ. पीके चतुर्वेदी, जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री संजय त्रिपाठी, सीएमएचओ हरदा डॉ. धुर्वे, सीएमएचओ बैतूल डॉ. प्रदीप मौजेस, संयुक्त उपायुक्त विकास श्री राजेन्द्र सिंह, डीटीएचओ डॉ. नलिनी गौर, समाज सेवी श्री अनिल अग्रवाल, बैतूल के ग्राम भारतीय संस्था के पदाधिकारी एवं संभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी मौजूद थे।