होशंगाबाद - ग्वालटोली निवासी आर टी आई कार्यकर्त्ता कृष्णकांत रूसिया की होटल में घुसकर मारपीट करने के मामले में लम्बे समय से फरार चल रहे पूर्व भाजपा पार्षद नंदकिशोर उर्फ़ नंदू यादव सहित १२ लोगों को माननीय मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राजेश अग्रवाल की अदालत ने ४३७ का आवेदन ख़ारिज करते हुए सभी आरोपियों को जेल भेजने के आदेश दिए हैं l
यह है पूरा मामला -
जानकारी के मुताबिक घटना दिनांक २५ अक्टूबर २०१७ को पूर्व पार्षद नंदू यादव ने अपने 11 रिश्तेदारों के साथ मिलकर दबंगई से आर टी आई कार्यकर्त्ता की दूकान में घुसकर खुलेआम मारपीट एवं तोड़फोड़ की थी l आवेदक ने सूचना के अधिकार के तहत नगरपालिका कार्यालय से जानकारी मांगी थी l इस बात से चिढ़कर नंदू यादव और उसके रिश्तेदारों ने ग्वालटोली स्टेशन के सामने केदार स्वीट्स में आरटीआई कार्यकर्त्ता पर हमला किया था l मामले की शिकायत के चलते मामला हाईकोर्ट तक जा पहुंचा था l
मामला कोतवाली पुलिस ने दर्ज किया था धारा ३२३,२९४,५०६,१४७,१४८,१४९,४५१ ,४२७, आईपीसी. के तहद अपराध पंजीबद्ध किया था जिसमे पुलिस ने राजनेतिक दबाव और दबंगई के चलते अपराधियों पर ४५१ की कार्यवाही करते हुए सभी आरोपियों को थाने से ही जमानत पर छोड़ दिया था l जबकि पुलिस को मालूम था की मामला ४५२ का है लेकिन ४५१ जमानतीय अपराध की श्रेणी में लेते हुए थाने से ही सभी आरोपियों को छोड़ दिया था l हालाँकि आरोपियों को मालूम था और थाने से जमानत पर छूटे जाने के बाद आरोपियों ने शेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत का आवेदन पेश किया था l शेसन कोर्ट से भी अग्रिम जमानत ख़ारिज हुई थी l मामले में हालाँकि ४५२ तो लगी ही थी इसी के चलते पुलिस द्वारा फिरसे आज सभी आरोपियों को गिफ्तार करके सीजीएम कोर्ट में पेश किया लेकिन फरियादी की और से जमानत पर आपत्ति लेने पर कोर्ट ने आरोपियों की जमानत को ख़ारिज करते हुए सभी १२ को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा है l
पुलिस की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में -
अब सवाल है कि आखिर मामले में आरोपियों की एक बार थाने से जमानत होने के बाद पुलिस ने शेशन कोर्ट में ४५२ के लिए आवेदन क्यूँ लगाया ? आरोपियों को थाने से जमानत पर क्यूँ छोड़ा ? आरोपियों को ४५२ में गिरफ्तार क्यूँ नहीं किया और गिरफ्तार करके न्यायालय में पेश क्यूँ नहीं किया ? वहीँ जब ४५१ में आरोपियों को थाने से जमानत दे दीगई तो l इससे स्पष्ट है पुलिस और अपराधी दोनों मिले हुए हैं या यूँ कहें दबंगई के चलते पुलिस ने कानून व्यवस्था को एक तरफ रखते हए आरोपियों को ४५२ में जमानत के लिए पर्याप्त समय दिया l कहीं न कहीं आरोपियों की दबंगई और पुलिस की मिलीभगत उजागर होती है l
ये गए सलाखों के पीछे-
पूर्व पार्षद नंदू यादव के साथ दौलत, ईश्वर, शशांक, राजेंद्र, रामप्रसाद, गोलू, ईशू, प्रीतम, गजेन्द्र, नितिन और एक अन्य शामिल हैं l