नई दिल्ली – सरकार एक ओर तो इंडिया को डिजिटल बनाने के लिए कई जतन कर रही है और लोगों को डिजिटल प्रोडक्ट इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है जिसके तहत लोगों को ऑनलाइन पेमेंट करने और स्मार्ट कार्ड पद्धति को अपनाने की बात कही जा रही हैl वहीं दूसरी तरफ लोगों की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए उनके पास कुछ नहीं है।
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि दिल्ली मेट्रो में रोजाना लाखों की संख्या में यात्री सफ़र करते हैं दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन ने मेट्रो की सुरक्षा के लिए बहुत से नियम बना रखे हैं लेकिन एक बिडम्बना ही है कि वह नियम यात्रियों के लिए नहीं हैं।
दिल्ली मेट्रो में रोजाना सफ़र करने वाले एक यात्री ने इस सम्बन्ध में DMRC से शिकायत की तो DMRC का बड़ा ही बेतुका जबाब आया है। उन्होंने जबाब में कहा है कि दिल्ली मेट्रो स्मार्ट कार्ड क्यक्तिगत न होकर हस्तान्तरणीय होता है l इसलिए हम इसे चोरी हो जाने या खो जाने की स्थिति में ब्लाक नहीं कर सकते l
दरअसल माजरा यह है कि रोजाना सफ़र करने वाले एक यात्री का मेट्रो स्मार्ट कार्ड चोरी हो गया जिसे उसने एक दिन पहले ही 700 रूपये से रिचार्ज करवाया था l यात्री ने मेट्रो में चोरी हुए स्मार्ट कार्ड की शिकायत DMRC को ईमेल के द्वारा भेजी जिसमे यात्री ने कहा की मेरा स्मार्ट कार्ड चोरी हो गया है अब उस कार्ड को ब्लाक करके मेरा दूसरा कार्ड बना दीजिये और नए कार्ड में मेरा amount ट्रांसफर कर दीजिये परन्तु डीएमआरसी द्वारा नियमों का हवाला देते हुए यह कहा गया कि हम कार्ड ब्लाक नहीं कर सकते हैं और amount भी वापस करने से मना कर दिया गया है उलटे यात्री से ही 130 रूपये जुरमाना वसूल लिया गया है।
अब सवाल यह उठता है कि जब स्मार्ट कार्ड ऑनलाइन रिचार्ज हो सकता है ऑनलाइन आपरेट हो सकता है कार्ड का नंबर डालते ही उसका पूरा रिकार्ड डिस्प्ले हो जाता है तो चोरी होने पर वह कार्ड ऑनलाइन ब्लाक क्यों नहीं हो सकता?
इसका जबाब किसी के पास नहीं है बस नियमों का हवाला दिया जा रहा है। मतलब यह है कि सारे नियम DMRC ने अपने खुद के लिए बना रखें हैं। यात्रियों की सुविधा और नुकसान की भरपाई के लिए उनके पास कोई नियम नहीं है। अब यह यात्री DMRC की बेरुखी से हताश होकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कर रहा है जहाँ वह भी जानता है कि लम्बी लड़ाई लड़नी होगी इस भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ l