मुंबई -    जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस ने अवैध रूप से बने बावखलेश्वर मंदिर परिसर को वैध करने का निर्देश दिया है। नवी मुंबई सहित राज्य के कई भ्रष्टाचार उजागर करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता संदीप ठाकुर ने इस अवैध निर्माण को लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री की भूमिका के ऊपर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री पूरी तरह से भूमाफिया के पक्ष में खड़े हैं। 

           उनका कहना है कि मुख्यमंत्री फडणवीस की इस भूमिका से भूमाफिया का मनोबल बढ़ेगा और वे लगातार गैरकानूनी कार्य को अंजाम देंगे। संदीप ठाकुर ने अपनी यह प्रतिक्रिया एमआईडीसी के लिए आरक्षित लगभग 15 हेक्टेयर भूखंड पर अवैध रूप से तैयार किए गए बावखलेश्वर मंदिर के परिसर को नियमित किए जाने के राज्य सरकार के फैसले के बाद दी है।

          बतादें कि नवी मुंबई के म्हापे एमआईडीसी क्षेत्र में लगभग 15 हेक्टेयर के एक विशाल क्षेत्र में बावखलेश्वर मंदिर का संपूर्ण परिसर स्थित है। जानकारी के अनुसार इस मंदिर के निर्माण में ठाणे जिला के पूर्व पालक मंत्री गणेश नाईक का सबसे अहम योगदान है। जानकारी के अनुसार इस मंदिर परिसर के निर्माण में लगभग २५ करोड़ रूपये से भी ज्यादा का खर्च आया है l 

         आरटीआई कार्यकर्ता संदीप ठाकुर ने सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के आधार पर इस बात का खुलासा किया था कि बावखलेश्वर मंदिर का पूरा परिसर अवैध रूप से एमआईडीसी की जमीन पर अतिक्रमण करके स्थापित किया गया है। 

अदालत अतिक्रमण के दोषियों पर कार्यवाही का आदेश दे चुकी है -

         जानकारी के अनुसार संदीप ठाकुर ने एक जनहित याचिका के माध्यम से इस अवैध मंदिर के निर्माण को चुनौती दी थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए मंदिर परिसर को पूरी तरह खाली किए जाने और इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण के लिए दोषी एमआईडीसी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश सुनाया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के विरुद्ध मंदिर ट्रस्ट ने सर्वोच्च न्यायालय का सहारा लिया था , लेकिन यहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। 

अब 6 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई - 

         जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह निर्देश जारी किया है कि यदि एमआईडीसी चाहे तो वह जमीन के बाजार भाव के हिसाब से कीमत वसूल कर ट्रस्ट के परिसर को नियमित कर सकती है। मुख्यमंत्री कार्यालय के इस निर्देश के बाद एमआईडीसी ने इस बारे में लिखित रूप से मंदिर ट्रस्ट को भी जानकारी दी है। एमआईडीसी के इसी लिखित पत्र के आधार पर मंदिर ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है, जिसपर 6 मार्च को सुनवाई होनी है।