रेहटी - प्रधानमंत्री आवास अधूरे हैं। इसके बाद भी शासन उनको पूरा कराने का अपना जिम्मा पूरा नही कर पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में बनने वाले ८० प्रतिशत आवास अधूरे हैं। इन आवासो में हितग्राहियों ने जैसे तैसे प्रयास करके दीवार खड़ी कर छत डाल लिया है। लेकिन फर्श और आवासो में शौचालय और पानी की व्यवस्था अब भी नही कर पाए है। जबकि इन आवासो की शासन द्वारा दी जाने वाली राशि ८० प्रतिशत निकाल ली गई है।
कई हितग्राहियों ने ९० प्रतिशत राशि निकाल ली है। तब भी आवास कंपलीट नही हो पाए है। इसके पीछे क्या कारण है यह बात न तो अधिकारी बताने को तैयार है। और ना ही हितग्राही। ग्राम जाजना ग्राम पंचायत मट्ठागांव के मांगीलाल राजाराम ने बताया कि आवास की लागत अधिक है और राशि कम है। ऐसे में पूरी राशि लगाने के बाद हमारी जैब से भी पैसा लग गया है। तब भी प्रधानमंत्री आवास में अंदर का प्लास्टर और छत का प्लास्टर एवं फर्श होना बाकी है। पेटिंग का खर्च अलग से होगा ।
बिडंबना यह है कि कई लोगो को प्रधानमंत्री आवास के १ लाख २४ हजार रूपए दिए गए है। जबकि उनके आवास पर जो सूचना पटल लगा है उस पर एक लाख ३८ हजार रूपए देने का लिखा हुआ है। जबकि कई अधिकारी प्रधानमंत्री आवास की राशि १ लाख ५६ हजार रूपए बता रहे हैं। लेकिन सही राशि क्या है इसकी जानकारी अधिकारी नही दे रहे हैं। जबकि प्रधानमंत्री आवास पूरे कराने के लिए जनपद पंचायत सीईओ बुदनी स्वयं भी सचिवो और सरपंचो के साथ समन्वय बैठाकर प्रधानमंत्री आवास पूरे कराने में जी जान से जुटे है। लेकिन चूक कहा हो रही है, जिसके कारण प्रधानमंत्री आवास पूरे नही हो पा रहे हैं। ऐसे हालत प्रत्येक ग्राम पंचायत में है। कहीं भी आवास पूरे नही बने हैं।
केवल वही आवास ही पूरे बने हैं,जिन्होने अपनी जेब से पैसा लगाकर प्रधानमंत्री आवास को अपना आवास मानकर भवन पूरे कराए हैं। आवास अधूरे होने में ग्रामीणों की अज्ञानता और प्रशासन की लापरवाही प्रमुख कारण है। क्योंंकि अधिकारी ग्रामीणोंं को प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी विस्तार से नही समझा पाए और ग्रामीणो में प्रधानमंत्री आवास को शासकीय आवास मान लिया और समझ लिया कि यह सरकार बनाकर दे रही है। जबकि यह योजना आवासहीनो को आर्थिक रूप से सहायता पहुंचाने की योजना है। जिनको धन की कमी है आवास नही बना सकते। उनकाके शासन से सहायता पहूुंचाकर यह आवास बनाने थे। लेकिन ग्रामीण इसे सरकार की जबावदारी मानकर योजना में पलीता लगा रहे हैं। लेकिन इस योजना की जानकारी अभी आमजनो तक विस्तार से नही भेजी जा रही है। इसके कारण ग्राामीण क्षेत्र में आवास अधूरे हैं।