विदिशा : पालकों की जेब पर खुला डाका डालने वाले निजी विद्यालयों को लगता है सरकार ने खुली छूट दे रखी है l शिक्षा या व्यवसाय ? यहाँ यह विचारणीय है भाजपा सरकार एक और तो मध्यप्रदेश जन शिक्षा को सरल सुगम बनाने तमाम प्रयास कर रही है, लेकिन स्कूली शिक्षा के तमाम नियम केवल अभिभावकों पर ही लागू क्यों किये जा रहे है ? निजी संस्थाओं पर क्यों नहीं l जानकारी के मुताबिक विदिशा के मगधम इन्टरनेशनल स्कूल ने दुर्भावना के चलते कक्षा ५ की छात्रा को बिना किसी कारण शिक्षा के अधिकार से वंचित कर रखा है l

            जाँच को लेकर यह मामला चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी तक जा पहुंचा है l CWC अध्यक्ष ने मामले में संज्ञान लेते हुए स्कूल प्रबंधन को बुलाया था लेकिन स्कूल प्रबंधन सामने आने से बचता नजर आ रहा है l छात्रा की माँ ने बताया की मेरी बेटी की ५ तारीख से छुट्टी है l और घर जाने का कह दिया है l क्लास में बैठने नहीं दिया जा रहा है l स्कूल के लिए रोज की तरह जब ऑटो वाला छात्रा को लेने जब घर आया तो ऑटो में उसकी क्लास के दूसरे बच्चे बैठे थे l उसे छुट्टी की जानकारी हुई तब ऑटो वाले ने स्कूल मोबाईल से जानकारी ली तो स्कूल द्वारा ऑटो वाले से कह दिया की उस बच्ची की छुट्टी है बाकि बच्चों की नहीं l स्कूल की इस बेरुखी से परिजन असमंजस की स्थिति में है l 

वास्तविक व्यवहार में ट्रांसपेरेंसी के बजाये टालमटोली का मामला 

अधिवक्ता वीरेन्द्र जैन ने आर.टी.आई के तहत  जिला शिक्षा अधिकारी विदिशा से स्कूल के संबंध में जानकारी मांग रखी है l फ़िलहाल मामला अपील में है l ६ महीने में सूचना का अधिकार केवल जिला पंचायत सी.ओ. तक ही पहुंचा है l जानकारी देने में एजुकेशन सोसायटी की सांसे फूलती दिखाई दे रही है l इसी दुर्भावना और मिलीभगत के चलते कक्षा ५ की मासूम बच्ची को शिक्षा के अधिकार से वंचित किया जा रहा है l जिला प्रशासन के कृपापात्र रहे मगधम स्कूल को बचने के उपाय सुझाये जा रहे हैं l इतना तो तय है अधिनियम की अज्ञानता का प्रदर्शन करने वालों को दण्डित किया जाना नेसर्गिक न्याय के सिधान्तों का पालन ही होगा l फ़िलहाल स्कूल प्रबंधन कटघरे में दिखाई दे रहा है l बता दें कि सी.बी.एस.ई नियमों के मुताबिक शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर स्कूल की मान्यता पर खतरा मंडरा रहा है l