नई दिल्ली - आप पार्टी के अयोग्य ठहराए गए २१ विधायकों को लेकर पार्टी के वकील मोहन पाराशर ने सुनवाई के दौरान एक बार फिर दुहराया है कि चुनाव आयोग ने उनके पक्ष पर विचार नहीं किया है l अब इस मामले में १२ फरवरी को कोर्ट में दुबारा सुनवाई होगी l चुनाव आयोग को भी कोर्ट में अपना पक्ष रखने का समय दिया जायेगा l

              दिल्ली हाई कोर्ट में आम आदमी पार्टी के अयोग्य ठहराए गए २१ विधायकों ने  सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखते हुए कोर्ट से कहा कि ऐसे कई विधायक हैं जिन्हें पार्लियामेंट सेक्रेटरी तो दिल्ली सरकार के द्वारा बनाया गया लेकिन उन्हीने इस पद का कोई फायदा नहीं लिया l सेक्रेटरी चुने जाने के बाद न तो कोई सरकार से कार ली है न ही ऑफिस l हालाँकि विधायकों के वकील के इस तथ्य के बाद कोर्ट का सवाल था कि अगर कार और ऑफिस जैसी सुविधाओं के लिए एलाटमेंट मिला था तो भले ही सुविधा का लाभ न लिया हो लेकिन उस पद पर रहते हुए यह ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के दायरे के कैसे नहीं आएगा ? 

             सुनवाई के दौरान आप विधायकों की तरफ से दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी और दिल्ली सरकार के अलग अलग विभागों से जुड़े दस्तावेज पेश किये गए है l जिनसे यह साबित करने की कोशिश की गयी है कि भले ही २१ पार्लियामेंट सेक्रेटरी दिल्ली सरकार ने बनाये हों लेकिन उन्हें कोई लाभ नहीं दिया गया कुछ तो ऐसे भी है जिन्हें किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिली, लिहाजा यह ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के दायरे में नहीं आता l सूत्रों के मुताबिक मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने १२ फरवरी को अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित की है l