राजगढ़ / सारंगपुर -  मालवा अंचल के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल भैंसवा माताजी स्थिति बीजासन माता मंदिर पर बीती रात श्रद्धा भक्ति शक्ति का संगम देखने को मिला l भेसवा माताजी में लगने वाले माघ मेले में पूर्णिमा की रात्रि को बिजासन माता मंदिर से निकलने वाली सवारी (डोली) अपने पूर्व के निर्धारित समय अनुसार और ऐतिहासिक परंपरा का निर्माण करते हुए निकाली गई l रात भर लाखों श्रद्धालु भक्ति, उमंग, उत्साह और आस्था के संगम में सराबोर होकर डोली के दर्शन करते हुए दिखे l मेले में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे l  अपने पौराणिक परंपरा और आस्था चमत्कारों का यह स्थान केंद्र बिंदु है l

             पूर्णिमा की प्रातः काल से लगाकर डोली निकलने वक्त तक करीब दो लाख के आसपास श्रद्धालुओं ने माता जी के दर्शन का लाभ लिया l बूढ़े, बच्चे, महिलाएं हर तरफ मैया के जयकारे करते हुए नजर आए l डोली में किन्नरों ने बधाई गीत गाकर वर्षभर आम जनता की सुख मय जीवन की मंगलकामनाओं के लिए बधाई गीत गाएं l चिरागों  की रोशनी जहां की परंपरा है ढोल की थाप पर रात भर किन्नर डोली के हर पड़ाव पर बधाई गीत गाकर नाच गान करते नजर आए l  शांतिपूर्वक तरीके से संपन्न डोली चंद्र ग्रहण होने के कारण निर्धारित समय से एक घंटा लेट उठाई गई मंदिर से निकलने के बाद डोली का भव्य स्वागत मंदिर के बाहर आतिशबाजी कर किया गया l अपने 13 विश्राम स्थलों पर डोली रोकी गई जहां पर रास्ते में आने वाले हर देव स्थान पर पूजा अर्चना की गई और हर विश्राम स्थल पर किन्नरों दे बधाई गीत गाकर श्रद्धालुओं भक्ति भाव में भाव विभोर कर दिया l 

            डोली के साथ ही एक आपदा गिर नामक एक झंडा साथ रहता है ज्ञात हो कि जब से डोली निकलना प्रारंभ हुई होगी जब से ही मंदिर में रखा हुआ यहां आपदा गिर नामक ध्वज पताका डोली के साथ चलती है जिससे डोली वाले दिन और डोली निकलते समय कोई भी आधा बाधाएं प्राकृतिक संकट दूर रहते हैं बताया जाता है कि उक्त ध्वज पताका का डोली के साथ होना ही सब संकटों को दूर करता है!